Earthquake से कांपी धरती: तिब्बत में तबाही, Nepal हिला, 53 लोगों की मौत, भारत में भी असर

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आज सुबह तिब्बत और नेपाल में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। यह भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह 6:35 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.1 मापी गई जो काफी खतरनाक मानी जाती है। भूकंप का केंद्र नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास था। चीन के बयान में बताया गया कि नेपाल सीमा के पास तिब्बत क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई है।

भारत के इन राज्यों में महसूस हुए झटके

भूकंप के झटके भारत के कई राज्यों जैसे बिहार, असम, सिक्किम और पश्चिम बंगाल में भी महसूस किए गए। बिहार में पटना समेत कई जिलों में लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप का केंद्र नेपाल के लोबुचे से 93 किमी उत्तर-पूर्व में था। फिलहाल किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है लेकिन इतनी तीव्रता वाले भूकंप में गंभीर खतरा रहता है।

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी की रिपोर्ट

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र तिब्बत के जिजांग क्षेत्र में था।

सुबह 6:30 बजे पहला झटका 7.1 तीव्रता का था। इसके बाद 7:02 बजे 4.7 तीव्रता, 7:07 बजे 4.9 तीव्रता और 7:13 बजे 5.0 तीव्रता के झटके दर्ज किए गए। इन झटकों के बाद लोग डरकर अपने घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों में जमा हो गए।

पिछले महीने भी आया था भूकंप

21 दिसंबर 2024 को नेपाल में 4.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। यह क्षेत्र लगातार भूकंप के खतरे में रहता है क्योंकि यहां टेक्टोनिक प्लेट्स की गतिविधियां बहुत अधिक हैं।

2015 का विनाशकारी भूकंप

अप्रैल 2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें:

: लगभग 9,000 लोगों की मौत हो गई थी।
: करीब 22,000 लोग घायल हुए थे।
: 8 लाख से ज्यादा घर और स्कूल तबाह हो गए थे।

नेपाल में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?

आईआईटी कानपुर के सीनियर प्रोफेसर जावेद एन मलिक के अनुसार हिमालय रेंज के नीचे टेक्टोनिक प्लेट्स लगातार अस्थिर रहती हैं। ये प्लेट्स जब आपस में टकराती हैं तो बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है जिससे भूकंप आता है।

भूकंप कैसे आता है?

पृथ्वी के अंदर 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स होती हैं जो हमेशा घूमती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो उनके कोने मुड़ जाते हैं। इस टकराव से दबाव बढ़ता है और जब प्लेट्स टूटती हैं तो धरती के अंदर से ऊर्जा बाहर निकलती है। यह ऊर्जा धरती को हिला देती है जिससे भूकंप आता है।

भूकंप का केंद्र और तीव्रता क्या होती है?

: भूकंप का केंद्र (एपिसेंटर): वह स्थान जहां प्लेटों के टकराव से ऊर्जा निकलती है।
: तीव्रता (Magnitude): भूकंप की ताकत को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है।

भूकंप की तीव्रता और असर

: 7 से ऊपर की तीव्रता: इमारतों और पुलों को गिराने में सक्षम।
: 9 और उससे ज्यादा: भारी तबाही और सुनामी का खतरा।
: रिक्टर स्केल पर हर अगले स्केल की तीव्रता पिछले से 10 गुना ज्यादा होती है।

सावधान रहने की अपील 

भूकंप के समय खुले स्थान पर जाएं, लिफ्ट का उपयोग न करें और भारी इमारतों से दूर रहें। वहीं आपातकालीन स्थिति के लिए हमेशा तैयार रहें।

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