कनाडा की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत; ट्रंप जैसा बातूनी नेता बन सकता प्रधानमंत्री, बढ़ेगा टकराव

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सोमवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की, जिससे देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। संसद अब मार्च तक स्थगित रहेगी, और इस बीच, ट्रूडो पद पर बने रहेंगे, जब तक लिबरल पार्टी अपना नया नेता, पीयर पोइलीवर, नहीं चुन लेती। कनाडा में अब एक नया दौर शुरू होने वाला है, जिसमें विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी के नेता पीयर पोइलीवर के प्रधानमंत्री बनने की संभावना प्रबल होती दिख रही है।अगर आगामी चुनावों में पोइलीवर को बहुमत मिलता है, तो वह कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में अत्यधिक शक्तिशाली हो सकते हैं। हालांकि, उन्हें पार्टी के भीतर और बाहरी दबाव, जैसे अदालतों, हाउस ऑफ कॉमन्स में विपक्ष, और सीनेट जैसी संस्थाओं से चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उनकी नेतृत्व क्षमता और कंजरवेटिव विचारधारा उन्हें बड़े फैसले लेने के लिए सक्षम बना सकती है।

पोइलीवर के प्रधानमंत्री बनने के बाद कनाडा में सांस्कृतिक और सामाजिक टकरावों की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि उनका राजनीतिक दृष्टिकोण और बयानबाजी लोगों में विभाजन पैदा कर सकती है। वे पत्रकारों पर हमला करने और तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के आरोपों में भी शामिल रहे हैं, जैसा कि ट्रम्प के साथ हुआ था। अगर पोइलीवर प्रधानमंत्री बनते हैं, तो यह न केवल कनाडा की आंतरिक राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकता है। उनके आने से कनाडा के विदेश नीति, घरेलू मुद्दों और समाजिक ताने-बाने में बड़े बदलाव आ सकते हैं, और साथ ही ट्रम्प जैसी विचारधाराओं का प्रभाव बढ़ सकता है। कनाडा में हो रहे इस राजनीतिक बदलाव ने सबका ध्यान आकर्षित किया है, और यह देखने योग्य होगा कि पीयर पोइलीवर के नेतृत्व में कनाडा की दिशा किस ओर जाएगी।

चुनावों के बीच वह अपनी नीतियों को तेजी से लागू करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता और ताकत हासिल कर सकते हैं। पीयर पोइलीवर और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच कई समानताएं हैं। पोइलीवर, जो 2004 से सांसद रहे हैं, एक कट्टरपंथी राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। उनका राजनीति में मजबूत रुख और संघर्षशील छवि उन्हें ट्रम्प से मेलखाती है। जैसे ट्रम्प ने अपनी राजनीतिक रणनीतियों में सख्त कानूनों का समर्थन किया और सरकारी खर्चों में कटौती की बात की, उसी तरह पोइलीवर भी यही रुख अपनाते हैं। उन्होंने समय-समय पर अपराध और सुरक्षा पर कड़ी नीतियों की वकालत की है और सरकार के खर्चों को नियंत्रित करने के लिए कटौती की बात की है। इसके अलावा, वह सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर बयानबाजी करते हैं, जो ट्रम्प की रणनीतियों से मेल खाती है।

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