शेयर बाजार में आज तेजी का रुख देखने को मिला। सेंसेक्स ने 300 अंकों की बढ़त के साथ एक मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी भी 50 अंकों की बढ़त के साथ 23,250 पर खुला। भारतीय शेयर बाजार ने आज ग्रीन जोन में शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त देखने को मिली। इससे पहले मंगलवार को भी बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला था, और आज यह सिलसिला जारी है।

पब्लिक सेक्टर बैंकों के शेयरों में आज मजबूती नजर आई। वित्त मंत्रालय की सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ प्रस्तावित बैठक ने इस सेक्टर में तेजी को बल दिया। SBI, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक जैसे बड़े बैंक स्टॉक्स में खरीदारी का रुझान रहा।
हालांकि बाजार में आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव की संभावना है। वैश्विक स्तर पर संकेत स्पष्ट नहीं हैं। अमेरिकी बाजारों में मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला, जहां Nasdaq में गिरावट आई, जबकि S&P 500 और Dow Jones में मामूली बढ़त रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि 20 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण और 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट के बाद ही बाजार की दिशा स्पष्ट हो सकेगी। इस समय सतर्कता के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
रुपया और क्रूड ऑयल में स्थिरता, आयात पर निर्भर क्षेत्रों को राहत
इससे पहले कल भारतीय रुपया मामूली मजबूत होकर 86.52 प्रति डॉलर पर खुला। यह एक दिन पहले सोमवार को 86.69 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर था। डॉलर इंडेक्स में नरमी आने से रुपये को मजबूती मिली, जिससे आयात पर निर्भर क्षेत्रों को कुछ राहत मिली है।
क्रूड ऑयल के दाम में गिरावट
मंगलवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। हालांकि, यह अभी भी 4 महीने के उच्चतम स्तर के करीब है। ब्रेंट फ्यूचर्स का भाव 0.27% गिरकर $80.79 प्रति बैरल पर पहुंच गया। रूसी क्रूड ऑयल पर अमेरिका के नए प्रतिबंधों के चलते भारत और चीन जैसे बड़े खरीदार अब नए सप्लायर्स की तलाश में जुट गए हैं।
आर्थिक प्रभाव:
रुपये में मजबूती: रुपये की मजबूती से आयातित वस्तुओं, विशेषकर कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की लागत में कमी आएगी।
तेल की कीमतों में स्थिरता: क्रूड के दाम में नरमी से पेट्रोलियम उत्पादों और संबंधित सेवाओं की कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
वैश्विक आपूर्ति पर दबाव: रूस पर प्रतिबंधों के कारण भारत और चीन जैसे देशों को नए विकल्पों की तलाश करनी होगी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बदलाव हो सकता है।


