JAMMU KASHMIR : : कश्मीर पुलिस ने प्रतिबंधित जमात ए इस्लामी के नेताओं के ठिकानों पर की ताबड़तोड़ छापेमारी, जानें वजह

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जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों में शामिल संगठनों के खिलाफ पुसिल और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पहले की तरह अब भी जारी है. इस क्रम में मंगलवार (25 मार्च) को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुलगाम में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के घरों पर एक बार फिर छापेमारी की. इस दौरान पुलिस की टीम ने कई आपत्तिजनक सामान जब्त किए हैं.

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने नए सिरे की गई छापेमारी को लेकर कहा कि घाटी में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े समूह से जुड़ी गतिविधियों को लेकर जांच चल रही है. यह अभियान अलगाववादी विचारधारा वाले समूहों को पूरी तरह खत्म करने के मकसद से चलाया गया है. इस योजना के तहत ही पुलिस ने कुलगाम के सोपत, देवसर और जांगलपोरा इलाके में प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोगों के घरों पर भी छापेमारी की है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक कुलगाम में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े समूह के नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों के बारे में सबूत जुटाने के लिए उनके घरों की तलाशी ली जा रही है. पुलिस यह काम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत कर रही है. पुलिस की टीम ने जमात-ए-इस्लामी के नेताओं के घरों की तलाशी ली है. इसका एक मकसद यह भी है कि जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखा जाए.

इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि प्रतिबंधित समूहों के खिलाफ कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक कि समूह से जुड़े लोग सभी गैरकानूनी गतिविधियां बंद नहीं कर देते. इस बीच सुरक्षा बलों द्वारा बनाए गए दबाव के कारण हुर्रियत के कम से कम दो पूर्व घटकों ने सार्वजनिक रूप से अपने पूर्ण अलगाव की घोषणा की है.

इस बीच अलगाववादी नेता गिलानी के करीबी रहे मोहम्मद शफी रेशी ने कहा, ‘उन्होंने साल 2017 में अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान डीपीएम के साथ सभी संबंध तोड़ लिए थे. तब से उनका इन संगठनों या किसी अलगाववादी इकाई से कोई संबंध नहीं है.

उन्होंने ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) की विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की वैध आकांक्षाओं और शिकायतों को दूर करने में विफल रही है. रेशी ने जोर देकर कहा कि वह अब पूरी तरह से अपने कानूनी पेशे के लिए समर्पित हैं.

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