NATIONAL : इस टाइगर रिजर्व में मिला लंबे मुंह वाला दुर्लभ वाइन स्नेक, देश में देखा गया दूसरी बार

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दुधवा टाइगर रिजर्व में एक दुर्लभ लंबे मुंह वाला वाइन स्नेक(Ahaetulla longirostris) पाया गया है. वन अधिकारियों ने ये जानकारी दी है. ये दुर्लभ सांप राज्य में पहली बार और देश में दूसरी बार देखा गया है.उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और बहराइच ज़िलों में फैले दुधवा टाइगर रिजर्व में एक दुर्लभ लंबे मुंह वाला वाइन स्नेक(Ahaetulla longirostris) पाया गया है. वन अधिकारियों ने ये जानकारी दी है. ये दुर्लभ सांप राज्य में पहली बार और देश में दूसरी बार देखा गया है.

उन्होंने बताया कि यह खोज 28 मार्च को पलिया खेरी डिवीजन में गैंडे को छोड़ने के अभियान के दौरान की गई थी, जब अधिकारी सुरक्षा के लिए दीमक के टीले को साफ कर रहे थे, तभी ये जीवंत हरा सांप दिखाई दिया. फील्ड बायोलॉजिस्ट विपिन कपूर सैनी और शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस प्रजाति की पहचान की.

इससे पहले, अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्ट्रिस को पिछले साल बिहार और ओडिशा में केवल एक बार देखा गया था. अधिकारियों ने बताया कि यह प्रजाति आमतौर पर दक्षिण पूर्व एशिया में पाई जाती है. सैनी ने कहा कि इस खोज से आने वाले साल में इस प्रजाति पर और अधिक शोध का मार्ग प्रशस्त होगा. सांप को सावधानीपूर्वक संभाला गया और उसे पास के दीमक के टीले में छोड़ भी दिया गया. अधिकारियों ने मूल टीले को बिना छेड़े ही छोड़ दिया.

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच.राजा मोहन ने इस खोज की सराहना करते हुए इसे रिजर्व की इकोलॉजिकल रिजनेस का प्रमाण बताया. उन्होंने कहा, ‘दुधवा अपने छिपे हुए खजानों को उजागर करता ही रहता है. अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्ट्रिस की रिडिस्कवरी सस्टेन्ड रिसर्च और हैबिटैट कंसर्वेशन के महत्व को उजागर करती है.’वन संरक्षक और दुधवा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक डॉ. रेंगाराजू टी. ने इसे भारतीय वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है.

उन्होंने कहा, ‘दक्षिण सोनारीपुर के ककराहा गैंडा पुनरुत्पादन क्षेत्र-1 में अहेतुल्ला लोंगिरोस्ट्रिस की रिडिस्कवरी, दीमक के टीलों जैसे सबसे छोटे यूनिट के इकोलॉजिकल सिग्निफिकेंस को हाइलाइट करती है, जो दुर्लभ प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रय प्रदान करते हैं.’

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