अहमदाबाद की सिर्फ 16 साल की लड़की थी, लेकिन उसकी पूरी जिंदगी पहले ही तय कर दी गई थी या तो 30 वर्षीय पुरुष से शादी कर लो या फिर परिवार से नाता तोड़ लो. जब कोई और रास्ता नहीं बचा, तो उसने वह कदम उठाया जिसे कोई सोच भी नहीं सकता था और वह घर से भाग गई. दुल्हन डरी-सहमी बिना ज्यादा सामान लिए वह साबरमती रेलवे स्टेशन पर उतरी. वहीं एक NGO कार्यकर्ता की नजर उस पर पड़ी. उसकी हिचकिचाहट और घबराहट को देखकर कार्यकर्ता को शक हुआ और उसने तुरंत अभयम 181 महिला हेल्पलाइन को सूचित किया. इस बीच आरपीएफ की टीम वहां पहुंच गई.

जांच में सामने आया कि दुल्हन बिहार के एक कस्बे से भागी थी, क्योंकि उसके माता-पिता उसकी शादी जबरन करवा रहे थे. जब उसने पढ़ाई जारी रखने की गुहार लगाई, तो उसकी एक न सुनी गई.
पुलिस ने जब उसके पिता से संपर्क किया, तो उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि हमें उससे कोई मतलब नहीं है! और उनकी बेरुखी ने सबको चौंका दिया. इसके बाद लड़की ने अपने मामा से मदद मांगी. जब उन्हें इस पूरे मामले का पता चला, तो वे भी हैरान रह गए. उन्होंने परिवार को शादी रोकने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन जब यह असफल रहा, तो उन्होंने आगे आकर उसकी जिम्मेदारी लेने का वादा किया.
लड़की को दो दिन सरकारी ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया, जहां से उसके मामा उसे लेने आए. उन्होंने भरोसा दिया कि वे न केवल उसकी सुरक्षा का ध्यान रखेंगे, बल्कि उसे पढ़ाई जारी रखने देंगे और कानूनी उम्र से पहले शादी नहीं करवाएंगे.
परामर्शदाताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक लड़की की कहानी नहीं है, बल्कि ऐसी कई लड़कियां हैं जो जबरन विवाह की शिकार होती हैं, लेकिन इसने हिम्मत दिखाई और अनजान शहर में भागकर अपना भविष्य बचाने का फैसला किया. अब NGO और महिला हेल्पलाइन की टीम इस लड़की की समय-समय पर निगरानी रखेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसे कोई और मुश्किल न झेलनी पड़े.

