DELHI : नौकर निकला खतरनाक मास्टरमाइंड, मालिक के घर से उड़ाए 80 लाख के गहने और 6 लाख कैश

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दिल्ली के हाई-प्रोफाइल डिफेंस कॉलोनी इलाके में एक महिला के घर से करीब 80 लाख रुपये के गहनों और 6 लाख रुपये नकद की चोरी का मामला सामने आया है. चौंकाने वाली बात ये है कि यह वारदात किसी बाहरी गैंग ने नहीं, बल्कि घर के नए घरेलू नौकर ने अंजाम दी. पुलिस ने कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर न केवल मुख्य आरोपी को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया, बल्कि चोरी के गहने और नकदी भी लगभग पूरी तरह बरामद कर ली.

14 दिसंबर 2024 को घर में काम पर रखा गया नौकर निर्मल मलिक महज 12 दिन में ही पूरे घर का मुआयना कर चुका था. जैसे ही उसे पता चला कि उसकी मालकिन परिवार समेत गोवा जा रही हैं, उसने वारदात की स्क्रिप्ट लिख डाली. 23 दिसंबर को मकान खाली होते ही उसने अपने साथी को बुलाया, ताले तोड़े और तिजोरी में रखे गहनों और लाखों की नकदी पर हाथ साफ कर दिया.

26 दिसंबर को जब घरेलू स्टाफ ने ताले टूटे देखे, तब वारदात का खुलासा हुआ. थाना डिफेंस कॉलोनी की टीम ने तुरंत जांच शुरू की. नौकर के फरार होने और फोन बंद होने से शक उस पर गहराया. टेक्निकल सर्विलांस, सीडीआर और इंटर स्टेट इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस को सुराग मिले कि आरोपी ओडिशा के बालासोर जिले का निवासी है.

जांच में पता चला कि धर्मेंद्र दास उर्फ राजा, एक पेशेवर घरेलू नौकर, चोरी में शामिल था. उसे ओडिशा के ईश्वरपुर क्षेत्र से पकड़ा गया. वहां आरोपी की पत्नी से 2 सोने की चूड़ियां और 6 लाख रुपये नकद बरामद हुए. इसके बाद सुनार प्रभाकर साहू से बाकी सोने के गहने, और सौदेबाज़ रति रंजन मलिक से केस प्रॉपर्टी को बेचने की जानकारी मिली.

तीनों को कानूनी रूप से पाबंद किया गया. मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी बनी पुलिस के लिए चुनौती मुख्य आरोपी निर्मल मलिक को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की टीम बेंगलुरु रवाना हुई. जानकारी मिली कि वह पीन्या इलाके में एक सोसाइटी में रसोइया बनकर छिपा हुआ है. सूत्रों और जमीनी इनपुट के आधार पर जाल बिछाया गया और उसे धर दबोचा गया.

आरोपी ने मालकिन के जाने की खबर मिलते ही प्लान बना लिया था. निर्मल मलिक ने बताया कि उसने जानबूझकर दिसंबर में नौकरी शुरू की थी, ताकि छुट्टियों के दौरान घर खाली मिले. उसने चाबी के मिलते-जुलते डुप्लीकेट बनवाए और भरोसे की आड़ में वारदात को अंजाम दिया.

इस वारदात ने साफ किया कि महानगरों में काम करने वाले घरेलू सहायकों की गहरी जांच-पड़ताल अब अनिवार्य हो गई है. ये महज चोरी नहीं थी, बल्कि प्लानिंग, रेकी, नेटवर्क और अंतरराज्यीय तालमेल का नतीजा था.

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