NATIONAL : गुरु जी को सैल्यूट! रिटायर होने पर होने बच्चों और शिक्षकों के साथ गांव वाले भी हुए भावुक

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सहायक अध्यापिका अकांक्षा सिंह ने कहा- भावुक विदाई को देख खुद सत्यराम भी भावुक हो गए. अपने अध्यापन के सफर को विस्तार से बताया कि उनके लिए बच्चों का पढ़ाना सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि कैसे जुनून बन गया था.

कहते हैं काम के बदले सिर्फ पैसा नहीं प्यार भी मिलता है. ऐसा ही कुछ यूपी के एक सरकारी स्कूल के टीचर के साथ हुआ जो स्कूल विदाई पर शिक्षकों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गया है. बस्ती में सरकारी स्कूल में गुरु और शिष्य में अटूट प्रेम देखने को मिला. जब शिक्षक के स्कूल से रिटायर होकर जाने का वक्त आया तो विदाई पर पूरा स्कूल रो पड़ा. बच्चे भी अपनी प्रिय गुरु जी के गले लगकर फूट-फूटकर रोए.

इस दौरान अन्य शैक्षिक-शिक्षिकाएं भी अपने आंसू रोक नहीं पाई. कोई शिक्षिका के गले से लिपट कर बेजार होकर रो रहा था तो कोई रास्ता रोके खड़ा था. एक टीचर की कमाई देख आप भी हैरान रह जाएंगे, जिंदगी भर बच्चों को पढ़ाकर जो कमाया, उस पर भरोसा नहीं होगा. रिटायरमेंट के वक्त एक टीचर का खुलासा हुआ तो लोगों की भीड़ जमा हो गई और फिर जो हुआ उसने सबको हैरत में डाला दिया.

ये हैं सत्य राम, हंटर पर सवार गले में फूलों की माला और पीछे उनके चाहने वाले, ये कोई नेता जी नहीं है बल्कि प्राइमरी स्कूल के एक मामूली से अध्यापक हैं. मतलब पेशे से टीचर. बस्ती के हरैया ब्लाक के कंपोजिट स्कूल बडेरिया कुंवर में तैनात रहे. जब रिटायर हुए तो स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के साथ-साथ पूरा इलाका स्कूल पहुंच गया.

एक टीचर के तौर पर पद से विदाई पर पूरा गांव सुबक कर रोने लगा. इस तस्वीर ने लोगों को भावुक कर दिया कि एक टीचर जो ना सिर्फ समाज का निर्माण करता है बल्कि देश के भविष्य का भी निर्माण करता है. वो टीचर अगर अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन करे तो उसकी कमाई किसी भी उद्योगपति से कहीं ज्यादा होती है.

वहां के सहायक अध्यापक अशोक वर्मा ने बताया कि सत्यराम करीब 38 साल तक अध्यपाक के तौर पर काम करते रहे. इस दौरान उन्होंने बच्चों को सिर्फ खानापूर्ति करने या फिर पगार पाने की चिंता के तौर पर नहीं पढ़ाया बल्कि उनके भविष्य को संवारने के लिए दिन रात मेहनत की.

वहीं सहायक अध्यापिका अकांक्षा सिंह ने कहा कि इस भावुक विदाई को देख खुद सत्यराम भी भावुक हो गए. अपने अध्यापन के सफर को विस्तार से बताया कि उनके लिए बच्चों का पढ़ाना सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि कैसे जुनून बन गया था. वहीं रिटायर अध्यापक सती राम वर्मा अपने प्यारे गुरु जी के रिटायर होने पर बच्चे भी भावुक हो गए और बताया कि उनके लिए सत्य राम के सिर्फ एक टीचर नहीं बल्कि क्या थे.जबकि स्कूल के बच्चों ने कहा कि वाकई एक टीचर ही है जो समाज का निर्माण करता है. बस कुछ लोग सिर्फ इसे एक पेशा समझते हैं और कुछ सत्यराम जैसे होते हैं जो इस जिम्मेदारी को बखूबी समझते हैं. तभी तो सत्यराम के रिटायरमेंट के समय हर कोई भावुक था.

 

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