NATIONAL : रूह अफजा मामले में दिग्विजय सिंह ने बाबा रामदेव के खिलाफ थाने में दी तहरीर, बोले- FIR दर्ज हो, नहीं तो कोर्ट जाऊंगा

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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस पैटर्न की तुलना ऐतिहासिक तानाशाहों से की और कहा, “हिटलर ने भी यही किया था. दुनिया के तमाम तानाशाह एक समूह को दुश्मन बताते हैं और जो उनके पक्ष में बात करता है, उसे देशद्रोही करार दिया जाता है.”

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमानों के खिलाफ साजिशन माहौल बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से एक सुनियोजित पैटर्न के तहत जुलूस निकाले जा रहे हैं और मस्जिदों के सामने जानबूझकर तेज आवाज में डीजे बजाया जा रहा है. सिंह ने दावा किया कि गुना में भी ऐसी ही घटना देखने को मिली. इसके अलावा कांग्रेस नेता ने योग गुरु बाबा रामदेव पर भी निशाना साधा.

दिग्विजय सिंह ने कहा, “एक नया चलन शुरू हुआ है, जिसमें मुसलमानों से सामान न खरीदने और उनका आर्थिक बहिष्कार करने की बात की जा रही है, जो कानूनन अपराध है.”उन्होंने आरोप लगाया कि रामदेव ने लोगों से रूहअफजा (Rooh Afza) न पीने की अपील की है, क्योंकि इसे मुसलमान बनाते हैं और इससे मस्जिदें व मदरसे बनाए जाते हैं.

कांग्रेस नेता ने इस पैटर्न की तुलना ऐतिहासिक तानाशाहों से की और कहा, “हिटलर ने भी यही किया था. दुनिया के तमाम तानाशाह एक समूह को दुश्मन बताते हैं और जो उनके पक्ष में बात करता है, उसे देशद्रोही करार दिया जाता है.” कांग्रेस नेता सिंह ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ वोट देने पर खुद को देशद्रोही कहे जाने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सवाल किया कि उनकी पुलिस ने जिन लोगों को ISI के लिए काम करने के आरोप में पकड़ा था, उस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि देश में आज विचारधारा की लड़ाई चल रही है. एक तरफ वे लोग हैं जो शांति चाहते हैं, और दूसरी तरफ वे जो धर्म के नाम पर व्यवसाय करते हैं और नफरत फैलाते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया, “हम नफरत फैलाने वालों के साथ कभी खड़े नहीं होंगे. हम शांति के लिए लड़ेंगे और इसमें कोई समझौता नहीं करेंगे.”

कांग्रेस ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों की लड़ाई करार दिया है, वहीं बीजेपी ने दिग्विजय सिंह के आरोपों को आधारहीन और तुष्टिकरण की राजनीति बताया है. बाबा रामदेव की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

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