DELHI : कनाडा भेजने के नाम पर 32 लाख की ठगी, 3 गिरफ्तार, रोके जाने पर हुआ खुलासा

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दिल्ली आईजीआई एयरपोर्ट एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस उषा रंगनानी के अनुसार जब एक यात्री को इमिग्रेशन के अफसरों ने चेकिंग के लिए रोका तो फर्जी एजेंटों का खतरनाक खेल सामने आया.

 

दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (IGI) एयरपोर्ट पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए तीन ठगों को गिरफ्तार किया. पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक ठक एक शख्स को किसी और के पासपोर्ट पर कनाडा भेजने की फिराक में थे. यह सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब एक यात्री को इमिग्रेशन चेक के दौरान पकड़ा गया. इस घटना ने एक बार फिर फर्जी एजेंटों के खतरनाक खेल को उजागर कर दिया.

IGI एयरपोर्ट एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस उषा रंगनानी (IPS) ने बताया कि 9 से 10 अप्रैल 2025 की रात को एक यात्री, जिसके पास कमलजीत सिंह के नाम का पासपोर्ट था, IGI एयरपोर्ट पर टोरंटो (कनाडा) जाने के लिए पहुंचा. जब इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसके दस्तावेजों की जांच की तो पासपोर्ट पर लगी फोटो उस शख्स से मेल नहीं खाई.

इमिग्रेशन अधिकारियों ने संदेह होने पर पूछताछ की तो पता चला कि उसका असली नाम मनप्रीत सिंह है. वह 40 साल है और पंजाब के मोहाली का रहने वाला है. सच सामने आने के बाद भारतीय इमिग्रेशन ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी से पूछताछ के बाद से इमिग्रेशन अधिकारियों को धोखा देने और कई अन्य मामले में पुलिस ने FIR दर्ज की है. फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है.

दिल्ली पुलिस की जांच टीम की पूछताछ में गिरफ्तार मनप्रीत सिंह ने चौंकाने वाले खुलासे किए. उसने बताया कि वह 12वीं तक पढ़ा है और 2007 से 2012 तक ऑस्ट्रेलिया में रहा था. भारत लौटने के बाद उसने ऑस्ट्रेलिया और यूके के लिए वीजा अप्लाई किया, लेकिन बार-बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. अपने दोस्तों से प्रेरित होकर उसने कनाडा जाकर पैसा कमाने का फैसला किया.

कनाडा जाने के लिए उसने मोहाली निवासी एजेंट रूपेंद्र सिंह के संपर्क में आया. रूपेंद्र ने 32 लाख रुपये में मनप्रीत को कनाडा भेजने का वादा किया और किसी और के पासपोर्ट पर उसकी यात्रा का इंतजाम किया था.

मनप्रीत ने पुलिस को बताया कि उसने रूपेंद्र को 20 लाख रुपये एडवांस दिए थे और बाकी रकम कनाडा पहुंचने के बाद देनी थी. 9 अप्रैल को रूपेंद्र के कहने पर वह दिल्ली आया और महिपालपुर के एक होटल में ठहरा. वहां उसे रूपेंद्र के दो साथियों, विशाल धीमान और हरीश चौधरी ने कमलजीत सिंह के नाम का फर्जी पासपोर्ट सौंपा, लेकिन पासपोर्ट पर चेकिंग के दौरान वह पकड़ा गया.

आरोपी मनप्रीत से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने अपने लोकल इंटेलिजेंस और टेक्निकल सर्विलांस के जरिए रूपेंद्र सिंह को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया, जहां वह छिपा हुआ था. पूछताछ में रूपेंद्र ने अपना गुनाह कबूल किया और बताया कि उसने 12वीं के बाद मोहाली में एक कंपनी में काम किया था, जहां उसकी मुलाकात विशाल से हुई. आसान और जल्दी पैसा कमाने के लालच में वह एजेंट बन गया. उसने मनप्रीत को कनाडा भेजने के लिए हरीश के जरिए कमलजीत सिंह के नाम का पासपोर्ट जुगाड़ा था.

पुलिस ने आरोपी रूपेंद्र के निशानदेही पर हरीश और विशाल को भी हिमाचल प्रदेश से धर दबोचा. अब पुलिस इस गिरोह के बाकी एजेंटों का पता लगाने, उनके बैंक खातों की जांच करने और अन्य मामलों में उनकी भूमिका तलाशने में जुटी है.

 

 

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