DELHI : लाल किले की मोती मस्जिद: औरंगजेब का सपना, जो जनता के लिए अभी नहीं खुलेगा

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दिल्ली के लाल किले में मौजूद मोती मस्जिद औरंगजेब की याद दिलाती है. जब औरंगजेब दिल्ली में रहता था तो यहीं पर वह नमाज पढ़ा करता था. इस मस्जिद को उसने 1663 में बनवाया था.

दिल्ली के लाल किले में बनी मोती मस्जिद, जिसे मुगल बादशाह औरंगजेब ने बनवाया था, अभी आम लोगों के लिए नहीं खुलेगी. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस मस्जिद को जनता के लिए खोलने की योजना बना रहा था, लेकिन औरंगजेब के नाम से जुड़े विवादों के कारण यह योजना टाल दी गई है. ASI किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहता है. आइए, जानते हैं इस मस्जिद की कहानी और इसे लेकर क्या है पूरा मामला?

लाल किले में मौजूद मोती मस्जिद औरंगजेब की याद दिलाती है. जब औरंगजेब दिल्ली में रहता था, तो यहीं पर वह नमाज पढ़ा करता था. इस मस्जिद को उसने 1663 में बनवाया था. इसका मकसद था कि उसे अपने निजी कमरों के पास एक ऐसी जगह मिले, जहां वह आसानी से इबादत कर सके. उस समय लाल किले में कोई दूसरी मस्जिद नहीं थी.

इस मस्जिद को बनाने में औरंगजेब ने खुद 1 लाख 60 हजार रुपये खर्च किए थे. मस्जिद के अंदर और बाहर संगमरमर का खूबसूरत काम किया गया है. बाहर से यह साधारण दिखती है, लेकिन अंदर की चित्रकारी और नक्काशी इसे खास बनाती है.

मोती मस्जिद की खासियत?

निर्माण: 1663 में पूरा हुआ
खर्च: औरंगजेब ने 1.60 लाख रुपये लगाए
खास बात: संगमरमर की दीवारें और फर्श, अंदर की खूबसूरत चित्रकारी
उद्देश्य: औरंगजेब के लिए निजी इबादत की जगह
क्यों बंद हुई मोती मस्जिद?

कहा जाता है कि जब औरंगजेब दिल्ली छोड़कर दक्षिण की ओर गया, तो उसने मस्जिद पर ताला लगवा दिया. उसका इरादा था कि वापस आने पर इसे फिर से खोला जाएगा. लेकिन औरंगजेब कभी लौटा नहीं. इसके बाद मस्जिद सालों तक बंद रही. इसका कोई सटीक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है.

1857 की क्रांति के दौरान जब ब्रिटिश सैनिकों ने लाल किले पर कब्जा किया, तो उन्होंने मोती मस्जिद को भी लूटा. मस्जिद के सुनहरे गुंबद और तंबू उतारकर नीलाम कर दिए गए. इससे मस्जिद को काफी नुकसान हुआ. बारिश का पानी अंदर घुसने से छतें भी खराब हो गईं. बाद में अंग्रेजों ने इसकी मरम्मत करवाई और कुछ हिस्सों को सफेद संगमरमर से बदला.

ASI ने हाल ही में मोती मस्जिद को आम लोगों के लिए खोलने की योजना बनाई थी. लेकिन औरंगजेब का नाम विवादों में रहता है, खासकर महाराष्ट्र में उनकी कब्र को लेकर चल रही बहस के बाद. कुछ लोग औरंगजेब से जुड़े स्मारकों को हटाने की मांग करते हैं. ASI का कहना है कि संरक्षित स्मारकों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. लेकिन विवाद से बचने के लिए ASI ने मस्जिद को अभी जनता के लिए न खोलने का फैसला किया है.

औरंगजेब का नाम हमेशा से इतिहास में चर्चा का विषय रहा है. कुछ लोग उन्हें धार्मिक कट्टरपंथी मानते हैं, तो कुछ उनके शासन को प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत बताते हैं. महाराष्ट्र में उनकी कब्र को हटाने की मांग ने भी इस विवाद को और हवा दी है. ASI नहीं चाहता कि मोती मस्जिद को खोलने से कोई नया विवाद शुरू हो.

लाल किला दिल्ली की शान है. यह मुगलकाल का एक शानदार नमूना है, जिसे शाहजहां ने बनवाया था. लेकिन मोती मस्जिद औरंगजेब की देन है. यह मस्जिद लाल किले के उस हिस्से में है, जो शाही परिवार के लिए था. औरंगजेब ने इसे अपनी सुविधा के लिए बनवाया, ताकि उसे बार-बार बाहर न जाना पड़े.

 

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