NATIONAL : अचानक गोलीबारी हो तो कैसे बचाएं जान? जम्मू में बॉर्डर इलाके में स्कूली बच्चों को ट्रेनिंग

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स्कूल के शिक्षक ने बताया कि आठ-दस सालों से फायरिंग होती रही है. पिछले दो सालों से ऐसा नहीं हो रहा. लेकिन स्थिति को देखते हुए ट्रेनिंग दी जा रही है.पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास वाले इलाकों में स्कूली बच्चों को शेलिंग (गोलीबारी) से बचने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. अरनिया के आखिरी गांव त्रैवा से एबीपी न्यूज़ ने ग्राउंड रिपोर्ट की है. पहलगाम हमने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बिगड़ रहे रिश्तों के चलते स्कूली बच्चों को ट्रेन किया जा रहा है.

तनाव के बीच जम्मू में सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग अपने बचाव के तरीके भी अपना रहे हैं. चाहे वह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बंकरों की सफाई हो या फिर सीमा पर लगे खेतों में फसल काटना.

स्कूली बच्चों को शिक्षक यह सीख रहे हैं कि अगर पाकिस्तान अचानक किसी हिमाकत पर उतर आता है और वो स्कूल में हैं तो अपनी जान कैसे बचाएं. स्कूल प्रशासन इस बाबत एक मॉक ड्रिल भी करवा रहा है ताकि स्कूली बच्चों को अपनी जान बचाने के तरीके आसानी से समझाया जा सके. इन स्कूली बच्चों को फायरिंग के वक्त अपनी जान बचाने के लिए स्कूल में लगे डेस्क के नीचे छिपने की ट्रेनिंग दी जा रही है और अगर गोलीबारी ज्यादा होती है तो स्कूल में ही बने बंकर में छिपने की भी ट्रेनिंग दी जा रही है.

स्कूल के शिक्षकों के मुताबिक की ट्रेनिंग बहुत जरूरी है क्योंकि जिस तरह की हिमाकत पाकिस्तान ने की है उसको उसका जवाब दिया जाना चाहिए. वे मानते हैं कि पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता और अगर पाकिस्तान किसी तरीके के दुस्साहस पर उतर आता है बच्चों को जान बचाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. स्कूली बच्चों का दावा है कि वे पाकिस्तान की फायरिंग से अक्सर प्रभावित होते हैं और इस तरह की ट्रेनिंग उन्हें मुश्किल समय में जान बचाने के लिए मददगार साबित हो सकती है

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