GUJARAT : अपनी मोहब्बत से शादी करने के लिए BJP विधायक ने 10 साल किया इंतजार, न प्रेम छोड़ा, न परंपरा तोड़ी…रचाई शादी

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दाहोद के BJP विधायक कनैयालाल किशोरी ने 10 साल तक परिवार को मनाने के बाद अपनी प्रेमिका सुमित्रा से समूह विवाह में शादी की. उन्होंने समाज को संदेश दिया कि परंपरा निभाते हुए भी प्यार को मंज़िल .

गुजरात के दाहोद जिले से बीजेपी विधायक कनैयालाल किशोरी ने 10 साल तक इंतजार करने के बाद आखिरकार अपने प्यार सुमित्रा से शादी कर ली. ये शादी किसी आम समारोह में नहीं बल्कि एक समूह विवाह कार्यक्रम में हुई, जहां तीन और जोड़ियों ने भी सात फेरे लिए. इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि कनैयालाल ने अपने परिवार की मंजूरी मिलने तक इंतजार किया, और बिना उनकी मर्जी के कोई फैसला नहीं लिया.

कनैयालाल किशोरी का कहना है कि उनके परिवार को इस रिश्ते से शुरू में ऐतराज था, जिसकी वजह थी कुछ पारंपरिक आदिवासी मान्यताएं. इन रिवाजों के अनुसार, किसी खास उपनाम या गांव के लोगों के बीच शादी की कुछ पाबंदियां होती हैं. ऐसे में परिवार को मनाना आसान नहीं था, लेकिन विधायक ने हार नहीं मानी.

किशोरी ने बताया कि वह सुमित्रा को काफी समय से जानते थे. वह उन्हीं के गांव की रहने वाली हैं और एक सादे परिवार से ताल्लुक रखती हैं. दो बहनों में एक सुमित्रा को वह अक्सर समाज सेवा के दौरान मदद करते थे. धीरे-धीरे ये रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ा और उन्होंने तय कर लिया कि शादी करेंगे तो सिर्फ सुमित्रा से ही.

आजकल जब लोग अपनी पसंद से शादी करने में परिवार की बात नहीं सुनते, वहीं विधायक किशोरी ने ये दिखा दिया कि प्यार और परिवार दोनों को साथ लेकर भी चला जा सकता है. उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता था कि परिवार को बिना बताए या उनकी इच्छा के खिलाफ जाकर शादी करूं. मुझे सुमित्रा का साथ भी चाहिए था और परिवार का आशीर्वाद भी.”

जब परिवार ने शादी के लिए हां कर दी, तो किशोरी ने एक नेक पहल करते हुए समूह विवाह का सहारा लिया. उन्होंने भील समाज पंचायत और बिरसा मुंडा ट्रस्ट से संपर्क कर शादी की व्यवस्था की. साथ में तीन और जोड़े भी इस समारोह में विवाह बंधन में बंधे. खास बात यह रही कि इस समारोह में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल हुए.

किशोरी का मानना है कि आदिवासी समाज में शादियों पर जरूरत से ज्यादा खर्च हो रहा है, जिसकी वजह से लोग कर्ज तक ले लेते हैं. इसलिए उन्होंने समूह विवाह को बढ़ावा देने का फैसला किया. उन्होंने शादी के सभी खर्च खुद उठाए और लोगों से अपील की कि वे भी इस तरह के आयोजनों में भाग लें ताकि समाज में बदलाव लाया जा सके.

 

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