UP : ‘इतने बड़े नेता नहीं हो…’, इटावा में शहीद सूरज यादव के घर पहुंचे सपा सांसद को ग्रामीणों ने घेरा, जमकर सुनाई खरी-खोटी, इस बात से थे नाराज

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इटावा में शहीद सूरज सिंह यादव के घर सांत्वना देने पहुंचे सपा सांसद जितेंद्र कुमार दोहरे को विरोध का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों ने सपा सांसद को जमकर खरी-खोटी सुनाई. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

यूपी के इटावा में शहीद सूरज सिंह यादव के घर सांत्वना देने पहुंचे सपा सांसद जितेंद्र कुमार दोहरे को विरोध का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों ने सपा सांसद को जमकर खरी-खोटी सुनाई. उनका आरोप है कि जितेंद्र कुमार दोहरे इतने बिजी थे कि शहादत के 6 दिन बाद गांव पहुंचे. इससे पहले जब उनको कॉल किया गया तो उन्होंने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया. अब जब सबकुछ हो चुका है तो खानापूर्ति के लिए मौके पर आए हैं. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

आपको बता दें कि इटावा के तहसील चकरनगर क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम प्रेम का पूरा गांव के निवासी 35 वर्षीय सूरज सिंह यादव 6 मई को कश्मीर में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए थे. उनकी गाड़ी खाई में पलट गई थी. उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी थी. नेताओं, अधिकारियों का जमावड़ा लगा था. मगर स्थानीय सांसद जितेंद्र कुमार दोहरे नहीं पहुंचे थे. ऐसे में जब बीते दिन वो शहीद के घर पहुंचे तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा.

ग्रामीणों और परिजनों ने सपा सांसद का विरोध करते हुए उन्हें खरी-खोटी सुनाई और सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया. शहीद सूरज की शहादत के बाद जब उनका अंतिम संस्कार किया गया था, तब क्षेत्रीय सांसद की अनुपस्थिति पर ग्रामीणों और परिजनों ने कड़ी नाराजगी जताई.

गांव वालों का कहना था कि उन्होंने सांसद को कई बार फोन किया, लेकिन न तो उन्होंने फोन उठाया और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुए. इसलिए सबकुछ होने के बाद सांसद का सांत्वना देने आना लोगों को रास नहीं आ रहा है. उनके करीबी लोग भी शहीद के घर तक नहीं आ सके. ऐसे में जैसे ही सपा सांसद गांव में पहुंचे, ग्रामीणों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया. माहौल गर्म होता देख सांसद ने शांत स्वर में लोगों से संवाद की कोशिश की और अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन शहीद के सम्मान और उपेक्षा के दर्द से भरे गांव वालों ने अपनी नाराजगी खुलकर जताई.

इस दौरान सांसद के साथ पहुंचे उनके समर्थक बगले झांकते नजर आए और प्रशासनिक अमले ने माहौल को शांत कराने की कोशिश की. ग्रामीणों के विरोध का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें ग्रामीण आरोप लगाते दिख रहे है कि जिस दिन जवान का पार्थिव शरीर लाया गया तब भी प्रशासन की व्यवस्थाएं खराब थीं. मीडिया ने साथ दिया. वहीं, जिस सांसद को हम लोगों ने चुनकर भेजा उसने फोन तक नहीं उठाया. इतने बड़े नेता हो गए हैं.

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