BUSINESS : एक साल में बिक गए 1.4 करोड़ AC, क्या गर्मी में एयर कंडीश्नर का सहारा लेकर हम अपने पैरों पर मार रहे कुल्हाड़ी?

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भारत में जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे मार्केट में एसी की डिमांड भी खूब बढ़ रही है. इससे बिजली की खपत भी खूब हो रही है, जिसकी आपूर्ति अधिकतर कोयले को जलाकर की जा रही है.

गर्मियां जैसे-जैसे बढ़ रही हैं वैसे-वैसे कूलर, फ्रीज, एयरकंडीश्नर की डिमांड भी बढ़ने लगी है. इसे देखते हुए कंपनियां भी अपनी सेल बढ़ाने के लिए तमाम तरह के ऑफर्स, स्कीम्स की पेशकश कर रही है. लोग भी चिलचिलाती धूप और गर्मी से कुछ राहत पाने के लिए अपने घरों में एसी लगवा रहे हैं. इसी का नतीजा है कि पिछले साल भारत में रिकॉर्ड 14 मिलियन एयर कंडीशनिंग यूनिट्स की बिक्री हुई.

अब जाहिर सी बात है कि एसी की मांग बढ़ने के साथ-साथ बिजली की भी डिमांड बढ़ेगी और अभी भी अधिकतर बिजली का उत्पादन कोयले को जलाकर किया जाता है, जिसका असर जलवायु पर पड़ता है.

इसके अलावा, एसी से क्लोरोफोरोकार्बन (CFC) और हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFC) जैसी निकलने वाली जहरीली गैसें ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ती है.

हालांकि, इतनी दूर की सोचने से पहले तुरंत मिलने वाली राहत को अधिक तवज्जो दे रहे हैं और इसी का नतीजा है कि मार्केट में धड़ाधड़ एसी की बिक्री हो रही है. बढ़ती गर्मी और मांग के चलते भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता एयर कंडीशनिंग मार्केट है, बावजूद इसके मौजूदा समय में केवल सात परसेंट घरों में ही एयर कंडीशनिंग यूनिट हैं.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस उछाल का मतलब यह है कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपना प्रोडक्शन तीन गुना बढ़ाना होगा.

एक सरकारी बयान के मुताबिक, 1.4 बिलियन लोगों का देश भारत ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर है, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ता है. ऊपर से 2024-25 में बिजली के उत्पादन में एक बिलियन टन कोयला जलाया गया.

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, एसी बनाने वाली जापान की कंपनी डाइकिन के भारत में प्रमुख के.जे. जावा ने कहा, ”आज के समय में एसी अब सिर्फ लग्जरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रात में अच्छी नींद के लिए यह जरूरी बन गया है, जो बेहतर फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है.”

मौसम विभाग के अनुसार, 1901 के बाद से 2024 भारत का सबसे गर्म साल रहा. नई दिल्ली में मई 2024 में हीटवेव के चलते तापमान साल 2022 की ही तरह 49.2 डिग्री सेल्सियस (120.5 डिग्री फारेनहाइट) के रिकॉर्ड हाई लेवल तक पहुंच गया. 2012 से 2021 के बीच भारत में हीटस्ट्रोक से लगभग 11,000 लोगों की मौत हो चुकी है.

संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम Cool Coalition के मुताबिक, साल 2050 तक एयर कंडीशनिंग भारत के उत्सर्जन का एक चौथाई और देश भर में बिजली की अधिकतम मांग का लगभग आधा हिस्सा होगा. हालांकि, स्थिति के सुधरने की भी संभावना है क्योंकि एनर्जी सेविंग इन्वर्टर एसी मार्केट में अपनी ज्यादा से ज्यादा जगह बना रहे हैं और कंपनियां भी यूनिट्स बेचते वक्त 24 डिग्री सेल्सियस का डिफॉल्ट टेम्परेचर सेट कर देती हैं.

 

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