WORLD : शांति-शांति चिल्लाकर अशांति फैला रहे शहबाज शरीफ! दिखाई अकड़, कश्मीर पर गंदा खेल फिर किया शुरू

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने  कश्मीर शहीदी दिवस के मौके पर फिर वही बातें दोहराईं जो पाकिस्तान सालों से करता आ रहा है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर के लोगों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा. भारत की तरफ से लॉन्च किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट अब खुलकर सामने आने लगी है. आतंकवाद पर भारत के प्रहार के बाद पाकिस्तान की सरकार अब अपने पुराने ‘कश्मीर कार्ड’ को फिर से खेल रही है.

1931 के मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि या सियासी इस्तेमाल?

शहबाज शरीफ ने 1931 में मारे गए 22 लोगों को श्रद्धांजलि दी. प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह बलिदान कश्मीरियों के स्वतंत्रता संघर्ष की नींव है. उन्होंने एक बार फिर से कश्मीर का राग अल्पा और कहा कि कश्मीरी अवाम कई पीढ़ियों से आजादी के लिए संघर्ष कर रही है.

कश्मीरी संघर्ष को बताया ऐतिहासिक और जीवंत

पीएम शहबाज ने कहा कि कश्मीरी अवाम कई पीढ़ियों से आजादी और मानवाधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है. उन्होंने कहा कि तमाम मुश्किलों और दमन के बावजूद कश्मीरियों की हिम्मत नहीं टूटी है, बल्कि उन्होंने एकता और दृढ़ इच्छाशक्ति से लड़ाई को जारी रखा है.

यूएन प्रस्तावों के प्रति फिर जताई प्रतिबद्धता

शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उन प्रस्तावों पर पूरी तरह से अमल का पक्षधर है जो जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान से जुड़े हैं. उन्होंने जोर दिया कि इस मुद्दे का शांतिपूर्ण हल ही दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति की कुंजी है.

शहबाज शरीफ ने वैश्विक समुदाय से की ये अपील

पाकिस्तानी ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि वह कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार हनन पर ध्यान दे और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से किए गए वादों को निभाए. उन्होंने कहा, “यह दिन दुनिया को याद दिलाता है कि कश्मीरियों के साथ दशकों से अन्याय हो रहा है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.”

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