ARTICLE : पाप से बचाता हार्दिक हुंडिया का ये लेख आप जरूर पढ़े और अब से सावधान हो जाए

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ओ जैनो ,

कई आप के पैसो से , आप ही कई पाप के भागीदार तो नहीं बन रहे है ? आप को पाप से बचाता हार्दिक हुंडिया का ये लेख आप जरूर पढ़े और अब से सावधान हो जाए

पर्वाधिराज पर्युषण महा पर्व में जैन साधुओ एक नियम ले , उनके प्राइवेट ट्रस्ट के रूपिया या ट्रस्टी के पास या ब्याज़ पे दिये हो वो पैसों से साधार्मिक भाईओ को मजबूत करे : हार्दिक हुंडिया

अनमोल जैन धर्म मिला है , राजा वर्धमान कुमार सब कुछ त्याग कर के भगवान महावीर बने तो वो भगवान के नाम रूपिया इकट्ठा कर के ओ संतों आप कौनसा धर्म आप हमे सिखा रहे है ? हार्दिक हुंडिया ने धर्म के नाम धंधा करने वाले हर संतो और उनके साथ मिलकर ये काम करने वालो से सवाल किया है की आप ने ये कौनसा धर्म शिखा और हमे शिखा रहे हो ?

एक संत के भक्त ने , एक साधु के करोड़ों रूपिया ब्याज़ पे लिया, भक्त का देहांत हो गया, उनके लड़के से साधु ने रुपया मांगा , लड़के ने कहा आप ने जिनको दिया उनके पास जाओ , अब ऐसा जवाब सुन के साधु के होश उड़ गए ! लेकिन ये तो होना ही था ,साधु ने साधु वेश में धर्म के नाम व्यापार किया , ग़द्दारी की , ऐसे साधु के भक्त भी ऐसे ही होगे ??? तू संघों को नुकशान कर मैं तेरा ! जब ऐसे किस्से सुनते है तब बहुत दुख होता है । सोचो , कहा जा रहा है हमारा धर्म ? साधु और श्रावकों की मिली भगत ??? कैसे रुपिया इकट्ठा करना ? कैसे नए नए अनुष्ठान बना के लोगो से धर्म के नाम ख़ुद के प्राइवेट ट्रस्ट में पैसे इकट्ठे करने वाले साधु और उनके भक्तों से अब सावधान हो जाओ

साधु के प्राइवेट ट्रस्ट के हिसाब यदि आप खोज करोगे तो साधु के संसारी पिताजी , भाई या उनके परिवार का ही अकाउंट संभालता मिलेगा ! प्राइवेट ट्रस्ट से बना मंदिर , उपाश्रय , धर्म शाला , भोजन साला के मालिक वो साधु ही बन जाते है और उनके कुकर्म जब बाहर आते है तब ये साधु प्राइवेट ट्रस्ट से बने उपाश्रय में जा के छुप जाते है । संघों के पैसा का दुरुपयोग ?

जागो संघों जागो
संघों के साधार्मिक भाईओ को मजबूत करो । हार्दिक हुंडिया ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा की कबूतर खाना दादर का मंदिर शायद पहली बार सुबह ८ बजे बाद मुख्य दरवाजा बंद कर दिया था , क्यों ? क्यों की जीवदया के लिये लड़ने वाले जैनों के ख़िलाफ़ आंदोलन था । कहा है हमारी खुमारी ? आज ये आंदोलन , कल कोई और आंदोलन ?क्षत्रीयो का जैन धर्म , राजा महाराजा की खुमारी कहा गई ? ट्रस्ट बनाकर धर्म के नाम ख़ुद का पेट भरने वाले ओ ट्रस्टों के साधुओ , आपने धर्म को धर्म की तरह हमे समझाया होता तो आज हमारी की ये हालत ना होती ? एक साधु , साध्वीजी के साथ रंगरेलियाँ करते पकड़ा गए , फिर भी पाँखण्डी आज भी साधु वेश में बैठा है । दो साधु कुकर्म के कारण जेल में जाने के बाद भी साधु वेश में आज भी बैठे है , ये धर्म के विरुद्ध चलने वाले साधु संसार में होने चाहिये, लेकिन फिर भी साधु वेश में बैठे है ! ये सब प्राइवेट ट्रस्ट का नतीजा है

हार्दिक हुंडिया ने देश के तमाम धर्म प्रेमियो से दो हाथ जोड़के बिनती करके कहा है की जो भी प्राइवेट ट्रस्ट खोल के बैठे है वो पैसे से , ओ साधु ओ , यदि आपने भगवान आदिनाथ से लेके भगवान महावीर तक का धर्म शिखा है तो वो परमात्मा का भक्त दुखी ना हो वो देखना आप का पहला कर्तव्य है आप का ये भी कर्तव्य है की ट्रस्टों के जो पैसे , आप के भक्त उपयोग कर रहे है , ब्याज पे घुमा रहे हो तो आप ख़ुद नर्क का दरवाजा खोल रहे है , आप रुक जाओ , ये भव और पर भव दोनों सुधारना हो तो आप प्राइवेट ट्रस्ट बंद करके वो पैसा साधर्मिक भाइयो के उत्थान के लिये लगाओ ये ही उच्च भावनाओ के साथ

हार्दिक हुंडिया
आप का शुभ चिंतक ।

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