ARTICLE : भारतीयों ने हीरा बेचने के लिये यू एस के साथ चिट किया या व्यापार ?

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भारत के हीरा व्यापार का मुख्य आधार यूनाइटेड स्टेटस ऑफ़ इंडिया हैं , भारतीय हीरा बाज़ार का ६० से ८० प्रतिशत कारोबार यू एस के साथ है । यू एस की सरकार ने हीरे पर अचानक ५० प्रतिशत टैक्स इंपोर्ट पर करने के कारण भारतीय हीरा व्यापार बहुत ही मुश्किल में आ गया है । ये बात कहते हुये डायमंड एक्सपर्ट हार्दिक हुंडिया में कहा कि हालांकि कुछ बड़ी कंपनिया ने यू एस के साथ व्यापार करने का रास्ता निकाल दिया है जो कि ये यू एस व्यापार के साथ एक तरह से क्या भारतीय व्यापारी चिट तो नहीं कर रहे है ? यू एस के छोटे छोटे स्थानिक हीरे के व्यापारी भारतीय हीरा बाज़ार से जो भी टैक्स हीरे के व्यापार पर है वो यू एस का है भरके लेते है । जैसे हीरा भारत से डायरेक्ट यू एस आता है तो ५० टका टैक्स लगता है , जो वहाँ के व्यापारी ये टैक्स पूरा चुका के लेते है । वहाँ के व्यपारियो को अचानक शक हो गया की भारतीय हीरे के व्यापारी भारत से यू एस वाया मैक्सिको से सीमेंट कंपनिया द्वारा ये हीरे दो नंबर में यू एस भेजते है , जिनका खर्चा ६ से ८ टका आता है । अब आप सोचो भारतीय व्यापारी वो हीरे वाजिब रेट में बेच सकते है । यदि भारतीय हीरे के व्यापारी ८ टका में हीरा भेजते है , जब की यू एस के प्रामाणिक हीरे के व्यापारी ५० टका टैक्स भर के हीरे का माल भारत से लेते है । भारतीय हीरे के व्यापारी और यू एस के हीरे के व्यापारी बीच में टैक्स का डिफरेंस बहुत आने की वजह से सीधा हीरा भारत से यु एस लाकर हीरा बेचना बहुत तकलीफ़ हो गया है । यू एस के व्यापारी को जब मालूम पड़ा की भारत के हीरा व्यापारी चिट करके हीरा यु एस लाते है तो स्थानिक व्यापारी बहुत तकलीफ़ में आ गये । भारतीय हीरा बाज़ार में चर्चा है कि हीरा बाज़ार की बड़ी बड़ी कंपनियों के जो नाम यू एस के साथ काम करने वालो के जो आ रहे वो चाहते है की ये मामला रफ़ा दफ़ा हो जाये । स्थानीक व्यापरियों ने ये बात ट्रंप तक पहोचाई । वहाँ की सेनेट में भी चर्चा ये चर्चा हुई की चिट करके , टैक्स बचाने के चक्कर में जिन्होंने माल इस तरह से लाया होगा तो वो हीरे जप्त भी हो सकते है ? हार्दिक हुंडिया ने कहा अब यू एस के साथ व्यापार करना भारतीय हीरे के व्यापारीओ के लिये बड़ा मुश्किल हो गया है । जब की भारतीय हीरा की सब से ज़्यादा डिमांड यू एस में थी । भारत के हीरा व्यापारी को हीरे का धंधा अब यू एस के साथ करना हो तो अब यू एस जाना पड़ेगा या वहाँ हीरे बनाने के कारख़ाने खोलते है ? लेकिन ये शक्य नहीं है , देखते है की अब क्या रास्ता भारतीय हीरे के व्यापारी निकालते है ! देश के यशस्वी प्रधान मंत्री के नेतृत्व को भी सलाम है , असली चाणक्य की भूमिका तो हमारे नरेंद्र मोदी जी भारतीय हीरा व्यापार बढ़े इस लिये निभा रहे है ।एक बार ट्रंप को जिताने की अपील करने वाले अब मोदी जी ट्रंप की दोस्ती नहीं लेकिन समय की माँग देखते हिंदी चीनी भाई भाई चाहते है । हार्दिक हुंडिया ने बताया की जो भी हीरा दूसरे देश से यू एस आते है तो हीरे के बिल में एक पॉइंट लिखा होता है की ओरिजिन जिस में आप ने ये हीरे कहा से इंपोर्ट किया वो लिखना पड़ता है , इंडिया से किया तो इंडिया लिखना पड़ता है , अब हीरा वाले कोई भी देश से हीरा यू एस भेजते है तो टैक्स पूरा भरना है । यू एस सरकार ने इंपोर्ट पर पर पहले १० टका फिर , २० , ३२ और अब ५० टका कर दिया है । यू एस में जो हीरा १५० मिलता है वो हीरा भारतीय हीरा व्यपारी अंदाजित ११० के आसपास बेचे तो भारतीय व्यापारी कमायेंगा लेकिन यू एस के व्यापारी नुकशान करेगा , दुनिया के कोई भी देश यदि इस तरह चीटिंग करके यू एस में माल भेजता है तो वहाँ की सरकार को मंजूर नहीं है ।

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