BUSINESS : H1B वीजा फीस बढ़ोतरी और FII सेलिंग से रुपए का निकला दम, डॉलर के मुकाबले टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा

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घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 100 अंक चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,250 पर कारोबार करता दिखा.
एच1बी वीजा फीस में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के बीच मंगलवार को भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में रुपया 25 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.53 पर आ गया.अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Forex Market) में डॉलर के मुकाबले रुपया 88.41 पर खुला और फिसलकर 88.53 पर पहुंच गया. यह पिछले बंद भाव (88.28) से 25 पैसे कमजोर है. एक दिन पहले सोमवार को भी रुपया 12 पैसे टूटा था.

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी और एच1बी वीजा फीस में इजाफे जैसी प्रतिकूल नीतियों ने निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर किया है. इस बीच, छह प्रमुख करेंसी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.03% गिरकर 97.30 पर आ गया.

घरेलू शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 100 अंक चढ़ा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 24,250 पर कारोबार करता दिखा. ऑटो और मारुति के स्टॉक्स में लगभग 2% का उछाल आया, वहीं आईटी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला.अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड 0.62% गिरकर 66.16 डॉलर प्रति बैरल पर रहा. शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को FII ने शुद्ध रूप से ₹2,910.09 करोड़ के शेयर बेचे.

रुपये की कमजोरी का सीधा असर रोज़मर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ता है. इंपोर्टेड सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, मशीनरी और तेल महंगे होंगे. भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है. रुपया कमजोर होते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऊपर जाती हैं. डॉलर महंगा होने से विदेश घूमने का खर्च बढ़ जाएगा. जो छात्र अमेरिका या अन्य देशों में पढ़ाई करने जा रहे हैं, उनकी फीस और रहन-सहन का खर्च काफी बढ़ जाएगा. सोने की कीमत डॉलर पर आधारित होती हैं, रुपया कमजोर होने से इसमें और तेजी आती है.

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