मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष स्वच्छ वायु सुनिश्चित करना है. पर्यावरण की स्वच्छता सबका कर्त्तव्य है.
उत्तराखंड ने इस साल दिवाली के अवसर पर वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है.राज्य के प्रमुख शहरों में इस बार हवा पहले से कहीं अधिक स्वच्छ रही. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI मध्यम या संतोषजनक श्रेणी में दर्ज किया गया,जो पिछले वर्षों की तुलना में एक सकारात्मक बदलाव है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष स्वच्छ वायु सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि नवाचार, जन जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से वास्तविक परिवर्तन संभव है,यह वर्ष इसका स्पष्ट उदाहरण है.

दिल्ली, लखनऊ और पटना जैसे महानगरों की तुलना में उत्तराखंड के शहरों ने कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. इस साल दिवाली के दिन दिल्ली में AQI स्तर 351 अत्यंत खराब लखनऊ में 250, पटना में 226 और भोपाल में 235 खराब श्रेणी दर्ज किया गया, जबकि उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, काशीपुर और रुड़की जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में रही.
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आर.के. सुधांशु ने बताया कि इस सुधार के पीछे सरकार और जनता दोनों की साझा भूमिका रही. उन्होंने कहा, ड्रोन से जल छिड़काव, यांत्रिक स्वीपिंग मशीनों की तैनाती और शैक्षणिक संस्थानों में चलाए गए जन-जागरूकता अभियानों ने ठोस असर दिखाया है.
देहरादून में ड्रोन आधारित वॉटर स्प्रिंकलिंग अभियान के जरिए पीएम-10 के स्तर को नियंत्रित किया गया. इसके साथ ही देहरादून और ऋषिकेश में नई यांत्रिक स्वीपिंग मशीनें लगाई गईं, जिससे सड़कों पर जमा धूल कम हुई. स्कूलों और कॉलेजों में ग्रीन दिवाली, क्लीन दिवाली जैसे अभियान चलाकर बच्चों और युवाओं को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में जागरूक किया गया.
इस बार पटाखों की सीमित बिक्री और नागरिकों की जिम्मेदारीपूर्ण भागीदारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह प्रवृत्ति बरकरार रहती है, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होगा, जहां दिवाली के दौरान भी हवा प्रदूषण-मुक्त बनी रहती है.


