NATIONAL : त्योहार में भीड़ बढ़ने से दिक्कत, लेकिन DTC बसों की संख्या में कोई कमी नहीं’, रेखा गुप्ता सरकार

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राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को लेकर आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर दिल्ली सरकार ने सफाई दी है. सरकार ने स्पष्ट कहा है कि दिल्ली में डीटीसी बसों की कोई कमी नहीं है और सभी रूटों पर बस सेवाएं पूरी तरह सुचारू और नियमित रूप से चल रही हैं.

परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार लगातार रूटों को बेहतर बनाने और बसों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने कहा, “हम हर रूट पर बेहतर कनेक्टिविटी, कम वेटिंग टाइम और आरामदायक सफर सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं.

सरकार ने कहा है कि त्योहारी सीजन में यात्रियों की संख्या बढ़ने की वजह से कुछ लोगों को हल्की असुविधा हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बसों की कमी है. राजधानी के हर रूट पर डीटीसी और क्लस्टर बसें सामान्य रूप से चलाई जा रही हैं.

बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी

विभाग के मुताबिक, फिलहाल दिल्ली में करीब 4,000 बसों का सक्रिय बेड़ा सड़कों पर दौड़ रहा है, जिनमें सीएनजी बसें, बड़ी इलेक्ट्रिक बसें और 9 मीटर लंबी देवी इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं. ये बसें 426 शहर रूट, 12 एनसीआर रूट और 70 विशेष रूट्स पर चल रही हैं. अगले साल तक सरकार बसों की संख्या बढ़ाकर 7,000 करने की तैयारी में है, जिससे दिल्ली और एनसीआर में यात्रा और आसान हो जाएगी.

यात्रीगण की सुविधा पर ध्यान

आईआईटी दिल्ली के सहयोग से बस मार्गों का पुनर्गठन किया जा रहा है ताकि सेवाएं यात्रियों की जरूरत के हिसाब से हों और प्रतीक्षा समय कम किया जा सके. नई बसें खासकर बाहरी इलाकों में चलाई जा रही हैं ताकि वहां के लोगों को भी अच्छी सुविधा मिल सके.सरकार ने साफ किया है कि किसी भी मार्ग पर बस सेवा बंद नहीं की गई है. ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में पहले की तरह बसें चल रही हैं. इसके साथ ही, यात्रियों की सुविधा के लिए नए बस क्यू शेल्टर (बस स्टॉप) भी बनाए जा रहे हैं.

डॉ. सिंह ने कहा कि रेखा गुप्ता सरकार का लक्ष्य एक सुरक्षित, पर्यावरण-हितैषी और भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था देना है. उन्होंने कहा, “दिल्ली में हर नागरिक को बेहतर बस सेवा मिले, इसके लिए हम फ्लीट बढ़ा रहे हैं, रूट सुधार रहे हैं और यात्रियों की जरूरत के हिसाब से सेवाएं व्यवस्थित कर रहे हैं. सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण भी कम होगा और राजधानी में स्वच्छ व आधुनिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित होगी.

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