मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने बॉस्टन आइवी हेल्थकेयर में 68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. कंपनी के निदेशकों पर शेयर आवंटन व फंड ट्रांसफर में अनियमितताओं के आरोप हैं.
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बॉस्टन आइवी हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड में बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले का मामला दर्ज किया है. यह मामला पहले अंधेरी MIDC पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था, जिसे अब EOW को आगे की जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया गया है. यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 344, 351, 61(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है.
सूत्रों ने बताया कि यह घटनाक्रम 1 अप्रैल 2024 से 30 अगस्त 2025 के बीच हुआ. शिकायत विवेक तिवारी (47 साल) नामक व्यक्ति ने की है, जो पहले कंपनी में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर कार्यरत थे.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी के निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने विवेक तिवारी को मनमाने ढंग से CEO पद से हटा दिया और इसके बाद कंपनी के शेयरों को ESOP ट्रस्ट के नाम पर अत्यंत कम दर पर आवंटित कर दिया. इतना ही नहीं, इसी अवधि में कंपनी के खातों से 264 करोड़ रुपये की बड़ी राशि विभिन्न असंबंधित तृतीय पक्षों को ट्रांसफर की गई.
विवेक तिवारी के अनुसार, इन अवैध और अनधिकृत वित्तीय लेनदेन के चलते उन्हें, जो कंपनी में 13% हिस्सेदारी रखते हैं, 34 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसी प्रकार कंपनी के सह-प्रमोटर केतन मल्कन, जिनकी भी 13% हिस्सेदारी है, उन्हें भी 34 करोड़ रुपये की क्षति हुई. इस प्रकार दोनों शेयरधारकों को कुल 68 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचा.
शिकायत में जिन लोगों को आरोपी बताया गया है उनमें नितीश बांदी, पिनक श्रीखंडे, चार्ल्स जैनसन, रविशंकर गोपालकृष्णन, जेंस नीयूवेनबॉर्ग, CEO दिनेश लोधा और CFO रमन चावला सहित अन्य निदेशक और अधिकारी शामिल हैं.यह अपराध कंपनी M/s Boston Ivy Healthcare Pvt. Ltd. के पंजीकृत कार्यालय- विरावली गांव, सीप्ज के पास, MIDC सेंट्रल रोड, महाकाली केव्स रोड, अंधेरी (पूर्व), मुंबई में घटित हुआ बताया गया है.
आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की जांच अपने हाथ में लेकर कंपनी के वित्तीय लेनदेन, शेयर आवंटन प्रक्रिया और ESOP ट्रस्ट के दुरुपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है. EOW अधिकारी अब बैंक खातों, शेयर ट्रांसफर और आंतरिक ईमेल संवादों की जांच कर रहे हैं ताकि फंड ट्रांसफर की सटीक श्रृंखला और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जा सके.


