कानपुर से एक दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है. यहां एक पान बेचने वाले युवक ने अपनी पत्नी को सरप्राइज देने के लिए पूरे एक साल तक 20 रुपये के सिक्के जमा कर एक लाख रुपये की रकम जुटाई. पत्नी को सोने की चेन गिफ्ट करने के लिए वह झोले में भरकर सिक्के लेकर ज्वेलर्स की दुकान पर पहुंचा. उसकी बात सुनकर दुकानदार का दिल भी पिघल गया.
यूपी के कानपुर शहर में एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों का दिल छू लिया. यहां एक 22 साल का पान बेचने वाला युवक अपनी पत्नी को सरप्राइज गिफ्ट देना चाहता था. इसके लिए उसने एक साल तक मेहनत कर 20 रुपये के सिक्के जमा किए और पूरे 1 लाख रुपये कर लिए. ये सिक्के लेकर ज्वेलर्स की दुकान पर पहुंच गया. युवक का सपना था कि वह अपनी पत्नी को सोने की चेन गिफ्ट करे. हालांकि उसकी पत्नी ने कभी इसकी डिमांड नहीं की, लेकिन वह पत्नी के दिल की ख्वाहिश को समझता था.

कानपुर के एचएएल चौराहे पर पान की दुकान चलाने वाले अभिषेक यादव की शादी एक साल पहले हुई थी. छोटी सी दुकान से घर का खर्च चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में पत्नी कभी कोई मांग नहीं करती थी. लेकिन उसके मन में एक सोने की चेन की इच्छा थी, जिसे अभिषेक ने महसूस कर लिया.
पत्नी को सरप्राइज गिफ्ट देने की चाह में अभिषेक ने अपनी दुकान पर आने वाले 20 रुपये के सिक्कों को जमा करना शुरू किया. धीरे-धीरे उसने एक साल में 1 लाख रुपये के सिक्के इकट्ठा कर लिए.इसके बाद अभिषेक 20-20 के सिक्के एक झोले में भरकर अहिरवां इलाके के सर्राफा कारोबारी महेश वर्मा की दुकान पर पहुंचा. उसने ज्वेलर्स की टेबल पर सिक्के लाइन से रखकर कहा- भैया, मुझे पत्नी को सरप्राइज गिफ्ट में सोने की चेन देनी है, ये एक साल में जुटाए हुए 1 लाख के सिक्के हैं. कृपया ले लीजिए.
शुरुआत में महेश वर्मा ने इतने सिक्के लेने से इनकार कर दिया और कहा कि बैंक भी इतनी बड़ी मात्रा में सिक्के नहीं लेता. लेकिन जब अभिषेक ने हाथ जोड़कर अपनी भावनाएं बताईं, तो ज्वेलर भावुक हो गया.
अभिषेक ने कहा कि मुझे अपनी पत्नी को सरप्राइज देना है. कभी उसने कुछ कहा नहीं और सोने की चेन चाहती है, लेकिन मेरी छोटी सी पान की दुकान देखकर वह डिमांड नहीं करती. यह सिक्के मैंने एक लाख के 1 साल में इकट्ठे किए हैं. इस पर ज्वेलर्स महेश वर्मा ने पत्नी के प्रति उसका लगाव देखकर सिक्के लेकर सोने की चेन दे दी.
अभिषेक दिवाली से पहले करवा चौथ पर पत्नी को सोने की चेन गिफ्ट करना चाहता था. लेकिन सोना एक लाख के पार पहुंच गया तो उसका हौसला टूट गया. फिर भी वह सिक्के इकट्ठा करना जारी किए था. इधर उसके पास जब एक लाख के सिक्के हो गए तो उसने सबको झोले में भरा और दुकान पर पहुंच गया.


