GUJARAT : कच्छ के भुजोडी गांव के 46 बुनकरों ने हासिल किया राष्ट्रीय सम्मान, VGRC में कच्छ की विरासत को नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध

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कच्छ का भुजोडी गाँव पारंपरिक कारीगरी का एक जीवंत और सशक्त केंद्र है। यह गाँव अपने 46 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पियों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस समृद्ध शिल्प विरासत में 6 संत कबीर पुरस्कार प्राप्तकर्ता, 20 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता, 1 शिल्प गुरु, 4 कला-निधि पुरस्कारधारी और हैंडलूम–हस्तकला क्षेत्र में विभिन्न राज्य पुरस्कार प्राप्त करने वाले बुनकर भी इसमें शामिल हैं।

भुजोड़ी के वांकर समुदाय के कुशल बुनकर गुजरात की समृद्ध, राजसी युग से चली आ रही वस्त्र परंपरा का गौरवपूर्ण उदाहरण हैं, जो आज भी आधुनिक युग में अपने प्राचीन कौशल की चमक बरकरार रखे हुए हैं। भुजोडी के कारीगर नानजी भीमजीभाई खारेत बताते हैं कि उन्हें और पूरे गाँव को प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनियों में वीवर्स सर्विस सेंटर विभाग से भरपूर सहयोग मिला है। भुजोडी के कारीगर फैबइन्डिया, जयपोर और गरवी गुजरात जैसी प्रतिष्ठित ब्रांड्स के साथ भी काम करते हैं।

भुजोडी विश्वभर में अपने हैंडलूम बुनाई के लिए जाना जाता है, जहाँ विश्व विख्यात भुजोडी शॉल, पारंपरिक ऊनी रजाइयाँ और कंबल तैयार किए जाते हैं। यहाँ के शिल्पकार जटिल बुनाई तकनीकों, पारंपरिक डिज़ाइनों और प्राकृतिक, समय-परखी रंगों का इस्तेमाल कर गुजरात के इतिहास की असल बनावट और सांस्कृतिक कथा को जीवित रखते हैं। यह सिर्फ कारीगरी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण प्रयास है, जिसे इन कारीगरों ने अपनी पीढ़ियों की मेहनत और समर्पण से जीवित रखा है।

अब इस विरासत के संरक्षण को एक बड़ा प्रोत्साहन मिलने जा रहा है। जनवरी 2026 के दूसरे सप्ताह में राजकोट में आयोजित होने वाले दूसरे वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेन्स (VGRC) और वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्ज़िबिशन (VGRE) में भुजोडी के ये शिल्पी विशेष रूप से भाग लेने जा रहे हैं। यह सहभागिता आर्थिक और नीतिगत, दोनों स्तरों पर बड़े लाभ का आधार बनेगी। यह क्षेत्रीय सम्मेलन कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र की आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति विशेषकर हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट क्षेत्र को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
इस कार्यक्रम में एक विशेष क्राफ्ट्स विलेज बनाया जाएगा जहाँ ये कारीगर अपने पुरस्कार-विजेता शिल्प का प्रदर्शन कर सकेंगे। साथ ही एक महत्वपूर्ण रिवर्स बायर–सेलर मीट (RBSM) भी आयोजित होगी जो इन MSMEs को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जोड़ेगी और नए निर्यात बाज़ारों के द्वार खोलेगी।

इसके अलावा, सम्मेलन का उद्यमी मेला कारीगरों को तात्कालिक व्यावसायिक सहयोग, आर्थिक सहायता, वित्तीय लिंकेज और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान करेगा जिससे समुदाय की उद्यमशीलता क्षमता और भी मजबूत होगी। पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान यह सुनिश्चित करेगा कि भुजोडी के ये पारंपरिक शिल्पकार अपनी कला-संरक्षण की मेहनत का स्थायी आर्थिक लाभ उठा सकें।

राजकोट का यह VGRC आयोजन भुजोडी के शिल्पियों के लिए अपने अनुभव, पुरस्कार और वैश्विक पहचान को दीर्घकालिक व्यापारिक सफलता में बदलने का एक ऐतिहासिक अवसर है। यह वह महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ भुजोडी की कला विरासत को वैश्विक मंच पर निरंतर फलने–फूलने के लिए आवश्यक निवेश और पहचान मिलने की उम्मीद है।

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