NATIONAL : उत्तराखंड में बिजली दरों पर बड़ा अपडेट, ऊर्जा निगमों के टैरिफ प्रस्तावों पर आयोग ने मांगा स्पष्टीकरण

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उत्तराखंड में बिजली दरों को लेकर महत्वपूर्ण प्रक्रिया शुरू हो गई है. प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों—उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल), उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) और पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल)—द्वारा भेजे गए टैरिफ प्रस्तावों में कुछ कमियां पाए जाने के बाद उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने इन पर बिंदुवार जवाब मांगा है. आयोग ने तीनों निगमों को 17 दिसंबर तक अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं.

ऊर्जा निगमों की ओर से नियामक आयोग को भेजे गए प्रस्तावों के अनुसार, इस बार बिजली दरों में कुल मिलाकर करीब 18.50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है. यूपीसीएल ने 16.23 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव दिया है, जबकि पिटकुल की ओर से लगभग तीन प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने की मांग की गई है. हालांकि, इस बार सबसे चौंकाने वाला प्रस्ताव यूजेवीएनएल की ओर से आया है, जिसने पहली बार ऋणात्मक यानी माइनस 1.2 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव भेजा है. नियामक आयोग के अधिकारियों के अनुसार, यूजेवीएनएल का ऋणात्मक टैरिफ प्रस्ताव अप्रत्याशित है. ऋणात्मक टैरिफ का अर्थ यह है कि निगम को आगामी वित्तीय वर्ष में किसी भी तरह की दर वृद्धि नहीं मिलेगी. आयोग के स्तर पर इस प्रस्ताव को लेकर भी गहन समीक्षा की जा रही है.

प्रस्ताव भेजने की समयसीमा की बात करें तो यूजेवीएनएल और पिटकुल ने 30 नवंबर से पहले ही अपने टैरिफ प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंप दिए थे, जबकि यूपीसीएल ने करीब नौ दिसंबर को अपना प्रस्ताव जमा कराया. आयोग के अधिकारियों ने तीनों प्रस्तावों का अध्ययन करने के बाद कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता जताई है, जिसके चलते पत्र भेजकर जवाब मांगा गया है.

आयोग को जब सभी जरूरी जानकारियां और स्पष्टीकरण प्राप्त हो जाएंगे, उसके बाद इन प्रस्तावों को औपचारिक रूप से याचिका के रूप में स्वीकार किया जाएगा. इसके पश्चात फरवरी माह में नियामक आयोग द्वारा टैरिफ प्रस्तावों पर जनसुनवाई आयोजित की जाएगी. इस दौरान उपभोक्ताओं, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी. जनसुनवाई और विस्तृत विश्लेषण के बाद आयोग वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा करेगा. यह नई दरें एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू होंगी. ऐसे में आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं की नजरें नियामक आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं.

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