RAJASTHAN : बहन को दिया वचन निभाया, चाय पीने देर रात घर पहुंचे आचार्य धीरेंद्र शास्त्री

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रामगंज में रह रहे परिवार को यकीन नहीं हुआ जब उनके दरवाजे पर पुलिस एस्कॉर्ट की गाड़ियां पहुंची. अपने सामने खुद धीरेन्द्र शास्त्री को देखकर दोनों बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

राजस्थान के कोटा में कथावाचक आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री की कथा रामगंज मंडी क्षेत्र में चल रही है. एक दिन पहले दो बहनों भावना राठौड़ और खुसबू राठोड़ ने उन्हें राखी बांधकर भाई बनाया और घर आने का वचन लिया था. जिस पर धीरेन्द्र शास्त्री ने बहनों का मान रखते हुए शनिवार देर रात उनके घर पहुंचे और परिजनों से मुलाकत की, साथ ही चाय भी पी. उनके साथ मंत्री मदन दिलावर भी मौजूद रहे.रामगंज में रह रहे परिवार को यकीन नहीं हुआ जब उनके दरवाजे पर पुलिस एस्कॉर्ट की गाड़ियां पहुंची. अपने सामने खुद धीरेन्द्र शास्त्री को देखकर दोनों बहनों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. धीरेन्द्र शास्त्री का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है.

एक दिन पहले शनिवार को इन दोनों बहनों ने कथा के दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने की इच्छा प्रकट करते हुए राखी बांधी थी. और राखी बांधने के बाद अपने भाई आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से निवेदन किया था कि वह उसके घर चाय पीने आएं. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपनी बहन को वचन दिया था कि वह तीन दिन यहां रामगंज मंडी में हैं तो उसके घर चाय पीने जरूर आएंगे.

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बहनों से किया हुआ वायदा निभाया भी सही. देर रात शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के घर पहुंचकर पहले तो उनके परिवार जनों से भेंट की और आशीर्वाद दिया. उसके बाद रामगंज मंडी लौटकर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री देर रात 12:00 बजे अचानक वार्ड नंबर 3 रामगंज मंडी में अपनी बहन खुशबू और भावना राठौड़ के घर पहुंचे.

अचानक अपने घर के बार कथावाचक धीरेन्द्र शास्त्री को देखकर दोनों बहनों ख़ुशी और भावना की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, दोनों के आंसूं निकल आए. इस दौरान भावना बोली मुझे विश्वास था मेरे भाई मेरे घर चाय पीने जरूर आएंगे. अपना किया हुआ वादा पूरा करेंगे. भावना ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को बताया कि वह दोनों बहने हैं, उनके कोई भाई नहीं है इसलिए वह आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को राखी बांधकर अपना भाई बनना चाहती थी.

उन्होंने कई बार प्रयास किया लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. रामगंज मंडी में जब कथा करने आचार्य शास्त्री पहुंचे तो दोनों बहनों ने ठान ली कि वह अब अपनी इच्छा पूरी कर के रहेगी. और हुआ भी ऐसा ही, आखिरकार वह आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने और घर पर बुलाकर चाय पिलाने में सफल रही.

दोनों बहनों के पिता लालचंद राठौर और माता हेमलता राठौर ने आचार्य जी को बताया कि यह अक्सर उनसे ऐसी बातें किया करती थी, परंतु उनको विश्वास नहीं होता था. कई बार बेटी को समझाया भी की यह संभव नहीं है. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री कभी भी उसके घर चाय पीने नहीं आएंगे. लेकिन बागेश्वर धाम सरकार का आशीर्वाद है कि बेटियों का सपना पूरा हुआ और आज स्वयं आप भगवान के रूप में हमारे घर पधारे हैं.

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने खुशबू के सर पर हाथ फेरते हुए कहा कि आज से हम तुम्हारे भाई हैं. भाई की कमी कभी महसूस मत करना. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बहन के घर लगभग आधा घंटा बैठकर चाय पी और उसके माता-पिता व उपस्थित अन्य परिजनों से हाल-चाल पूछे. और घर से विदा होने से पहले अपनी दोनों बहनों को बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण दिया. आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बच्चियों के पिता लाल चंद्र राठौर को बागेश्वर धाम की तरफ से एक कूपन भी दिया.

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