RAJASTHAN : ‘मैं मरा नहीं हूं, मुझे मारा गया’, सुसाइड से पहले सस्पेंड हुए टीचर ने जयपुर पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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मरने से पहले मनोहर भादू ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह 20 लोगों के परिवार में अकेले घर संभालने वाला है. 4 साल से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहा था और दोस्तों से उधार लेकर जा रहा था.राजस्थान की राजधानी जयपुर में बुधवार, 4 फरवरी की शाम को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. इस घटना ने न सिर्फ पुलिस तंत्र ब्लिक पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महेशनगर इलाके में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे और सस्पेंड चल रहे लेक्चरर ने चलती ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली.मृतक का नाम मनोहर भादू था. उसने सुसाइड नोट में सीधे-सीधे पुलिस और एसओजी के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है, “मैंने आत्महत्या नहीं की. मेरी इरादतन हत्या की गई है.”

यह घटना केवल एक आत्महत्या नहीं, बल्कि उस मानसिक और सामाजिक दबाव की कहानी है, जिसने एक पढ़े-लिखे, जिम्मेदार और परिवार के सहारे को मौत की पटरी तक पहुंचा दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लेक्चरर का शव करीब 3 घंटे तक रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहा. इस दौरान ऊपर से तीन ट्रेनें गुजर गईं, लेकिन किसी ने शव को हटाने की हिम्मत नहीं जुटाई.बाद में एक व्यक्ति ने साहस दिखाते हुए शव को ट्रैक से अलग किया, ताकि अन्य ट्रेनें प्रभावित न हों. घटना की सूचना मिलते ही महेशनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी में भिजवाया.

मनोहर ने सुसाइड नोट में लिखा है, “हाथ कांप रहे हैं, लेखनी ठहर रही है या कलम की स्याही खत्म हो रही है, वो ईश्वर जानता है. मैं घर के 20 सदस्यों में अकेला था, जो सबको संभालता था. मैं इतना कमजोर नहीं हूं, लेकिन गलत आरोप सहन नहीं हो रहे. पहले भी आरोप थे, लेकिन उनसे मैं नहीं मरा. कोर्ट में तारीखों पर जाता था, लेकिन खर्चे बहुत लग रहे थे. 4 साल से दोस्तों से उधार लेकर जी रहा हूं.”मृतक मनोहर भादू ने आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट को अपने परिवार और दोस्तों को भेजा. उसका स्क्रीनशॉट भी वायरल हो रहा है. पुलिस अब वायरल सुसाइड नोट की जांच कर रही है.

अभी तक पुलिस की ओर से यह नहीं बताया गया है कि मनोहर भादू मरने से पहले किस केस की बात कर रहा था? उसपर क्या आरोप लगे थे और वह कोर्ट के चक्कर क्यों लगाता था? हालांकि, उसके भेजे गए सुसाइड नोट में एक बात यह भी लिखी है कि पुलिस ने कई बेगुनाहों के साथ ऐसा ही किया है, जैसा उसके साथ हो रहा है. सेंट्रल जेल में जाकर देखो, मैं अपना वैसा हाल नहीं करना चाहता. रोज-रोज मरने से अच्छा है, एक बार में मर जाऊं.

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