सूरत में फिल्म ‘स्पेशल 26’ से प्रेरित एक शख्स इनकम टैक्स ऑफिसर बनकर ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट में अवैध वसूली करने पहुंचा. सूट-बूट और फाइलों के दम पर उसने व्यापारियों से 30 लाख रुपये की मांग की, जो बाद में 4 लाख पर आई. ओवर-एक्टिंग और आईडी न दिखा पाने पर शक हुआ, सूचना पर वराछा पुलिस ने आरोपी विजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया.
गुजरात के सूरत शहर में फिल्म ‘स्पेशल 26’ जैसी कहानी हकीकत में सामने आई है. यहां एक शख्स इनकम टैक्स ऑफिसर बनकर कपड़ा व्यापारियों से अवैध वसूली करने पहुंच गया. सूट-बूट, टाई, काला चश्मा और हाथ में फाइलें लेकर जब वह ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट में दाखिल हुआ तो पहली नजर में किसी को शक नहीं हुआ. लेकिन उसकी जरूरत से ज्यादा ओवर-एक्टिंग ने उसका भंडाफोड़ कर दिया और आखिरकार वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया.
दरअसल, यह मामला सूरत के वराछा थाना क्षेत्र स्थित ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट का है. यहां आरोपी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ खुद को इनकम टैक्स विभाग का क्लास-वन ऑफिसर बताकर व्यापारियों पर रौब झाड़ने लगा. उसने टैक्स चोरी और गड़बड़ी का डर दिखाकर पहले 30 लाख रुपये की मांग की, जो बाद में 4 लाख रुपये में सेटल करने की बात पर आ गई.

पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी पहली नजर में बिल्कुल सरकारी अफसर जैसा दिख रहा था. आंखों पर ब्रांडेड एविएटर चश्मा, कड़क प्रेस किया हुआ कोट-पैंट, गले में टाई और हाथ में इनकम टैक्स की फाइलें. उसका लुक इतना ऑफिशियल था कि कई व्यापारी धोखा खा गए. वह दुकान में घुसते ही फाइलें मेज पर पटक देता और ऊंची आवाज में टैक्स की गड़बड़ी की बात करने लगता, ताकि सामने वाला डर जाए.
आरोपी ने खुद को इतना आत्मविश्वासी दिखाया कि किसी को तुरंत शक नहीं हुआ. लेकिन बातचीत आगे बढ़ने पर उसकी भाषा और व्यवहार में गड़बड़ी नजर आने लगी. उसी दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उसे पहचान लिया, जिसके बाद व्यापारियों का शक और गहरा हो गया.पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी की पहचान 51 वर्षीय विजय सिंह रावत सिंह चौहान के रूप में हुई है, जो राजस्थान के पाली जिले का रहने वाला है. वह गिरफ्तारी से महज 24 घंटे पहले ही सूरत आया था और कतारगाम इलाके में अपने एक रिश्तेदार के घर रुका हुआ था, जो चाय की रेहड़ी चलाता है.
विजय सिंह ने पूछताछ में बताया कि वह पाली में टैक्स से जुड़े छोटे-मोटे काम करता रहा है. इसी वजह से उसे इनकम टैक्स विभाग की प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई की अच्छी जानकारी थी. इसी जानकारी के सहारे उसने खुद को इनकम टैक्स ऑफिसर बताकर व्यापारियों को डराने की कोशिश की.
जब व्यापारियों ने उससे आईडी कार्ड दिखाने को कहा, तो वह कोई वैध पहचान पत्र पेश नहीं कर पाया. इसके बाद व्यापारियों ने तुरंत वराछा पुलिस को सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को ब्लिस होटल से रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.गिरफ्तारी के वक्त भी आरोपी खुद को अधिकारी साबित करने की कोशिश करता रहा, लेकिन पुलिस के सामने उसकी फिल्मी एक्टिंग ज्यादा देर नहीं चली. पुलिस ने उसके खिलाफ जबरन वसूली यानी एक्सटॉर्शन के तहत मामला दर्ज किया है.
डीसीपी आलोक कुमार ने बताया कि आरोपी ने व्यापारियों को धमकाकर 30 लाख रुपये की मांग की थी और बाद में 4 लाख रुपये में सेटलमेंट की बात की. पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी अधिकारी इस तरह सीधे कैश में पैसे नहीं ले सकता. टैक्स या किसी भी सरकारी कार्रवाई के लिए हमेशा कानूनी प्रक्रिया होती है, नोटिस दिया जाता है और उसी के आधार पर कार्रवाई होती है.
पुलिस ने व्यापारियों और आम लोगों से अपील की है कि अगर कोई व्यक्ति खुद को इनकम टैक्स, जीएसटी या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर आए, तो सबसे पहले उसकी आईडी जरूर जांचें. जरा भी शक होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस, ACP या DCP को सूचना दें. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इससे पहले किसी और को अपना शिकार बनाया है या नहीं.

