ईरान में युद्ध और अमेरिका-इज़राइल के हमलों के कारण भारत की चीनी निर्यात प्रभावित हो रहा है. इस वजह से चीनी की मात्रा घरेलू बाजार में बढ़ेगी, जिससे दाम स्थिर रह सकते हैं. 2025-26 के सीजन में भारत का चीनी उत्पादन 12% बढ़ा है और मिलों के पास पर्याप्त स्टॉक है. ऐसे में युद्ध के कारण निर्यात कम होने से घरेलू बाजार को फायदा होगा और आम लोगों को चीनी की कीमतों में राहत मिल सकती है.
ईरान में चल रहे युद्ध और अमेरिका-इज़राइल के हमलों के कारण पूरी दुनिया के व्यापार पर असर पड़ रहा रहा है. लेकिन भारत के लिए चीनी को लेकर एक अच्छी खबर है. भारत अपनी बहुत सारी चीनी खाड़ी देशों (जैसे ईरान, UAE आदि) को निर्यात करता है, लेकिन युद्ध की वजह से माल भेजना मुश्किल हो गया है. जहाज अटक रहे हैं, बंदरगाह प्रभावित हैं, और मांग भी कम हो सकती है. ऐसे में नतीजा ये होगा कि भारत से कम चीनी बाहर जाएगी, और ज्यादा चीनी देश के अंदर ही रहेगी. इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है. ऐसे में आम लोगों को राहत मिल सकती है कि चीनी के दाम ज्यादा नहीं बढ़ेंगे.
भारत में चीनी का सीजन अक्टूबर से सितंबर तक चलता है. 2025-26 सीजन में फरवरी के अंत तक 24.75 मिलियन टन (लगभग 247.5 लाख टन) चीनी बन चुकी है. पिछले साल इसी समय तक 22.02 मिलियन टन चीनी बनी थी. यानी इस बार उत्पादन 12% ज्यादा है. हालांकि, पूरे साल का अनुमान करीब 29-30 मिलियन टन चीनी बन सकती है. लेकिन इसमें से कुछ चीनी एथेनॉल (पेट्रोल में मिलाने वाली) बनाने में चली जाती है, इसलिए बाजार के लिए उपलब्ध मात्रा कम हो जाती है.

28 फरवरी 2026 तक मिलों के पास 12.05 मिलियन टन चीनी का स्टॉक बताया गया था. जिसमें करीब 4.7 मिलियन टन पिछले साल की बची हुई चीनी भी जोड़ी गई थी. मार्च से सितंबर तक कुल 16-17 मिलियन टन चीनी उपलब्ध रहने का अनुमान है. पिछले साल इसी समय 16.1 मिलियन टन चीनी बांटी गई थी. इसका मतलब है कि इस बार बहुत ज्यादा अतिरिक्त चीनी नहीं बचेगी, स्थिति थोड़ी टाइट है, लेकिन संभली हुई है.
इस सीजन में सरकार ने कुल 2 मिलियन टन (20 लाख टन) चीनी निर्यात की अनुमति दी थी. लेकिन एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि युद्ध और खाड़ी में तनाव की वजह से सिर्फ 0.5 मिलियन टन (5 लाख टन) ही बाहर जा पाएगी.बाकी 1.5 मिलियन टन चीनी देश में ही रहेगी. इससे घरेलू बाजार में बड़ी राहत है कि चीनी की कमी नहीं होगी.
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक भारत के बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं. फरवरी तक महाराष्ट्र में 9.53 मिलियन टन (पिछले साल से ज्यादा), उत्तर प्रदेश में 7.48 मिलियन टन (थोड़ा ज्यादा) और कर्नाटक में 4.45 मिलियन टन (बढ़ोतरी) उत्पादन हुआ है.
अगर अगर युद्ध के कारण निर्यात कम हुआ तो देश में ज्यादा चीनी बचेगी. उपलब्धता अच्छी रहेगी तो दाम ज्यादा नहीं बढ़ेंगे. हालांकि, उत्पादन अनुमान से कम हुआ तो थोड़ी टेंशन हो सकती है. फिलहाल स्थिति संभली हुई है और आयात की जरूरत नहीं दिख रही है. ऐसे में ईरान का युद्ध भारत के लिए चीनी के मामले में ‘बोनस’ साबित हो सकता है. घरेलू बाजार को फायदा और आम लोगों की चाय और मिठाई में मिठास बनी रह सकती है.

