LIFESTYLE : शीतला अष्टमी कब है, जानिए बासी भोजन का भोग लगने वाले बसोड़ा पर्व की परंपरा

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चैत्र महीन के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर शीतला अष्टमी मनाई जाती है. इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च को है. इस दिन शीतला माता की पूजा होती है और उन्हें बासी भोजन का भोग लगाया जाता है.होली के बाद शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाता है. यह होलिका दहन के आठवें दिन और चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है. विशेषकर उत्तर भारत जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में यह पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है.

इस साल शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को पड़ रही है. अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च रात 01:54 पर हो जाएगी और 12 मार्च सुबह 04:19 तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार 11 मार्च को शीतला अष्टमी का व्रत और पूजन किया जाएगा. पूजा के लिए 11 मार्च को सुबह 6 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 27 मिनट तक का समय रहेगा.

आमतौर पर लगभग हरेक पूजा-पाठ मे शुद्ध और ताजा भोग लगाया जाता है. लेकिन शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा है. बासी और ठंडा भोजन का भोग लगाने पर माता प्रसन्न होती हैं. इसलिए शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है. सप्तमी तिथि पर ही घरों में पुरी, पकौड़ी, कढ़ी, मीठे चावल, हलवा, आदि जैसे व्यंजन तैयार किए जाते हैं और अगले दिन शीतला अष्टमी पर इन चीजों का भोग लगाया जाता है. बासी भोजन का भोग लगने के कारण इस पर्व को कई स्थानों पर ‘बसौड़ा’ या ‘बासोड़ा’ जैसे नामों से भी जाना जाता है. शीतला अष्टमी पर शीतला माता को बासी भोजन का भोग लगाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता की पूजा होती है. शीतला माता को रोग-शोक और विशेषकर चेचक व त्वचा रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. ‘शीतला’ शब्द का अर्थ होता है शीतलता प्रदान करने वाली देवी. लोक मान्यता के अनुसार, शीतला माता के आशीर्वाद से ही घर-परिवार में स्वास्थ्य और सुख-शांति बनी रहती है.

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