ईरान में मोजतबा हुसैनी खामेनेई अपने पिता आयतुल्लाह अली खामेनेई की गद्दी पर बैठ गए हैं. उन्हें देश का सर्वोच्च नेता बना दिया गया है. यह फैसला ट्रंप की धमकी के बावजूद लिया गया.ईरान के इतिहास में एक अहम पल आ गया है. आयतुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता बना दिया गया है. उनके पिता की मौत के कुछ दिन बाद ही ईरान के एक्सपर्ट्स असेंबली ने यह फैसला लिया. ईरान की 88 सदस्यों वाली धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने ‘निर्णायक वोट’ से मोजतबा खामेनेई को तीसरे सर्वोच्च नेता के रूप में चुना है. अब वह अपने पिता आयतुल्लाह खामेनेई की गद्दी पर बैठ गए हैं.

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही नाम की घोषणा हुई, ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और राजनीतिक नेताओं ने तुरंत मोजतबा खामेनेई के प्रति निष्ठा की शपथ ली. IRGC ने बयान जारी करते हुए कहा, ‘हम नए नेता आयतुल्लाह सैयद मोजतबा खामेनेई के हुक्म का पालन करने और खुद को कुर्बान करने के लिए तैयार हैं. सेना के शीर्ष नेतृत्व ने पूरी वफादारी का वादा किया है.’ संसद के स्पीकर ने इसे ‘धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य’ बताया है. सुरक्षा प्रमुख ने कहा कि नया नेता इस मुश्किल वक्त में देश को सही दिशा दिखाने में सक्षम हैं.असेंबली ने मदरसों और यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स समेत पूरे देश से अपील की है कि वे नए नेता के पीछे एकजुट हो जाएं और देश की एकता बनाए रखें. मोजतबा खामेनेई 56 साल के हैं. वे लंबे समय से अपने पिता के ऑफिस में काम कर रहे थे और IRGC से बहुत करीबी रिश्ते रखते हैं. वे सार्वजनिक रूप से ज्यादा नहीं दिखते थे, लेकिन पीछे से बहुत ताकतवर माने जाते थे. उन्हें ‘पावर ब्रोकर’ और ‘गेटकीपर’ कहा जाता था.
मोजतबा 1980-88 तक 17-18 साल की उम्र में ईरान-इराक युद्ध के आखिरी दिनों में शामिल हुए थे. IRGC की हबीब इब्न मजाहिर बटालियन में सेवा दी थी. युद्ध के कई कमांडर बाद में IRGC में ऊंचे पदों पर पहुंचे. युद्ध के बाद मोजतबा कोम चले गए, जहां उन्होंने शिया धर्म की पढ़ाई की. कई कंजर्वेटिव विद्वानों के पास तालीम ली. आज उनकी रैंक हुज्जतुल इस्लाम है.


