BUSINESS : चावल से लेकर आलू-प्याज हर चीज भेजी जाएगी, जंग की आग में धधक रहे मिडिल-ईस्ट को खाना भेजता रहेगा भारत

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भारत ने जंग की आग में धधक रहे मिडिल-ईस्ट के लिए खाने-पीने की चीजों की सप्लाई जारी रखने का फैसला लिया है. हालांकि, इसमें लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई चुनौतियां भी हैं.

भारत और मिडिल-ईस्ट के बीच मजबूत और गहरे व्यापारिक संबंध रहे हैं. एक तरफ भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इन पर निर्भर हैं. वहीं, खाड़ी देश अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर है. ऐसी स्थिति में जब अमेरिका और इजरायल के हमलों से मिडिल-ईस्ट में तनाव चरम पर है, भारत ने मध्य-पूर्व में शामिल देशों के लिए खाने-पीने की चीजों की सप्लाई जारी रखने का फैसला लिया है.

गुरुवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि चल रहे संघर्ष के कारण पैदा हुई रुकावटों के बावजूद भारत मध्य-पूर्व के देशों को खाद्य सामग्री की आपूर्ति जारी रखेगा. हालांकि, शिपमेंट का पैमाना लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और बढ़ती लागत पर निर्भर करेगा.

राजेश अग्रवाल कहते हैं कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कई रास्तों पर विचार कर रही है कि जरूरी चीजों की सप्लाई में कहीं कोई रुकावट न आए. उन्होंने कहा, “वे जहां भी संभव हो हवाई कार्गो या लंबे रास्तों के जरिए काम कर रहे हैं ये सभी विकल्प इसलिए तलाशे जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भोजन पहुंच जाए क्योंकि भोजन हमारी प्राथमिकता बना हुआ है.

दरअसल, ईरान में छिड़ी जंग और उसके जोखिम के चलते मालवाहक जहाजों का वॉर रिस्ट इंश्योरेंस प्रीमियम 0.05 परसेंट से बढ़कर 0.75-1 परसेंट तक पहुंच गया है. इससे ढुलाई की लागत में भी करीब 20-30 परसेंट का इजाफा हुआ है.
पहले लाल सागर या होर्मुज स्ट्रेट से सामान आसानी से पहुंचाए जाते थे, लेकिन अभी तनाव की स्थिति में जहाजों को केप ऑफ गुड होप (अफ्रीका के नीचे) से होकर जाना पड़ रहा है. इससे सफर में 15-20 दिन तक का ज्यादा वक्त लग रहा है. ऐसे में खाने-पीने की चीजों के खराब होने, ऑर्डर्स के देरी से पहुंचने और पेमेंट में देरी होने का खतरा बढ़ गया है. सफर में ज्यादा वक्त लगने से डीजल पर खर्च भी बढ़ रहा है.
कई देशों में अपना एयरस्पेस भी बंद कर रखा है. ऐसे में कार्गो कैपेसिटी भी घट गई है और ऊपर से लागत भी बढ़ गई है.
भारत से मिडिल-ईस्ट जाने वाले सामान
मिडिल ईस्ट में शामिल देश जैसे कि सऊदी अरब और ईरान, भारत से बासमती चावल का सबसे बड़र खरीदार है.
भारत खाड़ी देशों को आलू, प्याज, हरी सब्जियां, ताजे फल, इलायची, चाय और कॉफी, डेयरी प्रोडक्ट्स, फ्रोजन फूड आइटम्स भेजता है.
इनके अलावा, दवाइयां भी भेजी जाती हैं. एक्सपोर्ट की लिस्ट में टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स और ज्वेलरी भी शामिल हैं.

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