NATIONAL : ‘पहले इस बात का जवाब दें कि…’, नक्सलमुक्त भारत के ऐलान पर प्रियंका चतुर्वेदी का BJP से सवाल

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भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने देश को नक्सल मुक्त बनाने की तारीख रखी थी 31 मार्च. इससे एक दिन पहले ही उन्होंने लोकसभा में ऐलान कर दिया कि अब भारत नक्सल मुक्त हो गया है. नक्सलियों के नेटवर्क को चलाने वाले टॉप 12 नक्सली मारे जा चुके हैं और लाल आतंक का खात्मा हो गया है.

अमित शाह के ऐलान पर शिवसेना यूबीटी की राज्यसभा सासंद प्रियंका चतुर्वेदी की प्रतिक्रिया आई है. प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “नक्सलवाद पर कार्रवाई यूपीए के कार्यकाल से शुरू हुई थी. अब ये लोग आकर इसके खात्मे का क्रेडिट ले रहे हैं. उसमें योगदान सिर्फ एक सरकार का नहीं हो सकता. नक्सलियों का खात्मा लगातार जारी रहने वाला एक्शन है. पुलिस फोर्सेस को पुख्ता करना, कोब्रा जैसे फोर्स बनाना… छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की सरकार ने इसपर काम किया था.”

प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा, “कोई भी इसपर इकलौता हक जमाए कि नक्सलियों का खात्मा उनकी वजह से हुआ है, यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है. जबसे बीजेपी सरकार में आई है तबसे ऐसी ही चीजें देखने को मिल रही हैं.”शिवसेना यूबीटी नेता ने आगे कहा, “नक्सलवाद के खात्मे पर सदन में चर्चा हुई, बहुत अच्छी बात है, लेकिन इस बात पर चर्चा कब होगी कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले जो जानकारी लीक हो गई थी, इंटेलिजेंस फेलियर की वजह से इतना बड़ा आतंकवादी हमला हुआ… फिर लाल किले पर टेरर अटैक हुआ. इसमें इंटेलिजेंस ब्यूरो की वर्किंग पर कब चर्चा होगी? इसकी जवाबदेही कब तय की जाएगी?”

शिवसेना यूबीटी सांसद ने आगे कहा, “अभी जनता को सबसे ज्यादा क्या प्रभावित कर रहा है. जिसकी वजह से महंगाई बढ़ रही है, हर चीज के दाम बढ़ रहे हैं, उसकी वजह मिडिल ईस्ट में हो रहा युद्ध है. लोगों को एलपीजी सिलेंडर के लिए कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, यह इसी युद्ध की वजह से हो रहा है. हम मांग कर रहे हैं कि इसपर भी चर्चा हो.”

बीजेपी सरकार पर तंज कसते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “चलिए आप नक्सलवाद पर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं तो थपथपाइये, लेकिन जो मौजूदा समय में सबसे बड़ा संकट हमारे देश में आया हुआ है, जो दूसरे देशों की वजह से हो रहा है, उसपर भी चर्चा होनी चाहिए.”

घोसी से समाजवादी पार्टी सांसद राजीव राय ने कहा, “किसी भी बीमारी की डायग्नोसिस करनी चाहि, वजह पता करनी चाहिए कि नक्सलवाद क्यों होता है? कोई हिंसा का समर्थन नहीं करता. हम बहुत ही खतरनाक दौर से गुजर रहे हैं. जो लोग देश के लिए शहादत देते हैं, संसद से लेकर सीमा तक जो लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा करते हैं, उनका अपमान होता है. समाज में जाति-मजहब और कपड़ा देखकर अन्याय होता है. कोई मां की कोख से नक्सली या आतंकी पैदा नहीं होता. अगर सरकार लगातार दमनकारी नीति अपनाती रहे, भेदभाव करती रहे, लोगों में असमानता का भाव रहे. भाषणों में तो अच्छा लगता है लेकिन जमीन पर वह हकीकत नजर नहीं आती है.”

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