पश्चिमी एशिया में छिड़ी जंग को खत्म कराने के लिए ‘शांतिदूत’ बनने की कोशिशों में लगे पाकिस्तान को पहले ईरान ने आइना दिखाया तो अब इजरायल ने भी उसकी भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं.
ईरान जंग में ‘चौधरी’ बनने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को बैक टू बैक झटके लग रहे हैं. पहला झटका ईरान ने दिया, जब उनसे दो टूक कहा कि जंग रोकने के लिए की जा रही कोशिशें पाकिस्तान की खुद की हैं, ईरान का इससे कोई लेना-देना नहीं है. वहीं, अब इजरायल की ओर से भी पाकिस्तान के ‘शांति दूत’ बनने पर सवाल उठाए गए हैं और भारत को इसके लिए बेहतर विकल्प बताया.
इजरायली विदेश मंत्रालय के विशेष दूत फ्लूर हसन नहूम ने एक इंटरव्यू के दौरान जंग में पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं मालूम कि पाकिस्तानियों को क्या लगता है कि वे क्या कर रहे हैं. लेकिन मुझे लगता है कि उनकी कोशिश खुद को प्रासंगिक बनाने की हैं. वे खुद जिहादी आतंकवाद की दुनिया में एक बड़ी समस्या हैं, वह मध्यस्थता की कोशिश कर सकते हैं लेकिन मुझे भरोसा नहीं है कि वह बहुत सफल होंगे.’

फ्लूर हसन नहूम ने इस दौरान भारत की भूमिका को लेकर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, ‘भारत इजरायल का बेहद करीब सहयोगी है. जैसा कि आपको मालूम है कि युद्ध की शुरुआत से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल गए थे. हम समझते हैं कि भारत सभी के साथ बेहतर संबंध रखता है.’ उन्होंने आगे कहा, अगर आप मुझसे पूछेंगे तो पाकिस्तान की तुलना में भारत कहीं बेहतर मध्यस्थ हो सकता है. लेकिन देखना होगा कि चीजें आगे कैसे बढ़ती हैं.’
बता दें कि पाकिस्तान अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग को खत्म कराने लिए मध्यस्थता की कोशिशें कर रहा है. रविवार (29 मार्च) को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्रियों के साथ इस्लामाबाद में बैठक के बाद वह अमेरिका-ईरान के बीच वार्ता आयोजित करेगा. लेकिन ईरान ने बातचीत से साफ इनकार कर दिया है. सोमवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पाकिस्तान के साथ हुई बैठकों को लेकर साफ कहा कि ये उनकी अपनी पहल हैं, इसमें ईरान शामिल नहीं है.

