ENTERTAINMENT : चौधरी असलम की मौत की कहानी: बीवी से मांगी माफी, दी दुआएं और हुआ धमाका

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फिल्म धुरंधर 2 में संजय दत्त द्वारा निभाए गए चौधरी असलम के किरदार को उनकी पत्नी नूरीन ने गलत बताया है. नूरीन ने बताया कि असलम ने कभी बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी. पति की मौत को लेकर भी उन्होंने आज तक संग बातचीत की.

फिल्म धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा रही है. ग्लोबली इसका डंका बजा रहा है. मूवी में पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी चौधरी असलम का रोल संजय दत्त ने प्ले किया था. इस किरदार में संजू बाबा का काम सब ने पसंद किया. लेकिन रियल चौधरी असलम की पत्नी नूरीन ने कहा कि उनके पति की गलत छवि फिल्म में पेश की गई है. आज तक संग हुई खास बातचीत में नूरीन ने ल्यारी ऑपरेशन, रहमान डकैत के एनकाउंटर के अलावा पति चौधरी असलम की मौत पर रिएक्ट किया है.

चौधरी असलम को अपनी नौकरी से ज्यादा लगाव था. उनके बारे में लंदन, अमेरिका सब जगह खबरें छपती थीं. धुरंधर फिल्म की बात करें, तो संजय दत्त पर रोल बहुत जचा है, गेटअप अच्छा है. फिल्म में जो नेगेटिव चीजें दिखाई गईं कि वो फर्जी एनकाउंटर करता है, बच्चों को मारता है तो रियल में ऐसा कुछ नहीं था. चौधरी बोलता था कि मेरे जाने के बाद मेरी जिंदगी पर फिल्म बनेगी. फिल्म बनी भी लेकिन उसमें चौधरी के किरदार के साथ इतना इंसाफ नहीं हुआ. फिल्म बनाई तो एक काल तो करते, मुझे करते, पुलिस को करते किसी न्यूज वाले को करते, फैमिली को करते कि चौधरी की नेगेटिव और पॉजिटिव चीजें क्या हैं. कहानी के अंदर इतना बड़ा किरदार शो नहीं किया, एक ल्यारी को कर दिया, ल्यारी इतना बड़ा भी नहीं जितना बड़ा बना डाला. संजय दत्त पर किरदार एकदम जमा. संजय दत्त जब गाड़ी के पास होता है और आंखें ऊपर करता है, तब वो एक पल को लगा चौधरी असलम है.अदाकारी भी संजय दत्त ने बहुत बेहतरीन की है. संजय दत्त बताएं कि चौधरी का रोल करके कैसा लगा, आज के दौर में कहां पहुंचे, इंडिया के लोग बता सकते हैं.मैंने थोड़ी फिल्म देखी किसी ने क्लिप भेजी थी. जहां पर ब्लास्ट होता है मैंने वहां तक देखी. संजय दत्त ने गालियां बहुत दी हैं (हंसते हुए) जो फैमिली में नहीं देख सकते लेकिन उस बंदे पे जची हैं, पुलिस में वैसे गालियां चलती हैं. शक्ल, सूरत सारे अंदाज संजय दत्त के जचे हैं. संजय दत्त को चौधरी असलम बहुत पसंद करता था और मैं भी बहुत पसंद करती हूं, एक्टर कभी गलत नहीं होते ये याद रखियेगा. ल्यारी के अंदर जब बैठे होते हैं संजय दत्त साहब वहां पर भी वो बहुत जचे हैं.

चौधरी असलम ने ल्यारी में रेड डाली थी, उस दौरान रॉकेट लॉन्चर चले थे, गोलियां चलीं थीं दोनों तरफ से, एयरक्राफ्ट उड़े थे, ल्यारी गैंग के दौरान औरतों को आगे कर देते थे. पाकिस्तान के कानून के मुताबिक, आप औरतों पर गोली नहीं चला सकते. चौधरी सारी कहानियां घर में नहीं बताता था. जिस वक्त चौधरी ल्यारी पहुंचा सब चैनल पर LIVE चल रहा था. तो मैने कॉल किया तब चौधरी ने बोला आप परेशान न हों, मैंने कहा वहां गोलियां चल रहीं हैं, सारा सिस्टम जाम हो रखा है. आप कैसे हो? वहां चौधरी ने कहा- कुछ नहीं है. जो दिन लिखा होगा उस दिन कोई नहीं बचा पाएगा.

ल्यारी ऑपरेशन में चौधरी ने बुलेटप्रूफ नहीं पहनी थी, चौधरी असलम ने अपनी लाइफ में कभी बुलेटप्रूफ नहीं पहनी थी. फिल्म में संजय दत्त ने भी नहीं पहनी है. मैंने कई दफा उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने को कहा था. लेकिन वो नहीं माने. मैंने कहा था- इतने बड़े मामलों में पहना करो, फैमिली भी इसमें सफर करती है, बहुत सी कुर्बानियां होती हैं, हम कभी आजाद नहीं थे और न कभी होंगे.

डिफेंस इलाके में जब हमारे घर में बम ब्लास्ट हुआ थे उस वक्त मैंने असलम पर प्रेशर डाला था कि आप सेफ गाड़ी में जाएं, बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल करें. लेकिन असलम गाड़ी में जाता था और कुछ दूर जाकर उतर जाता था. सितंबर 2011 में घर में ब्लास्ट हुआ था, असलम चौधरी उस रात गश्त कर रहा था. सड़क पर रात 2 बजे का टाइम था. मैंने कॉल किया कि आप घर कब आयेंगे, बोला मुझे अभी टाइम लग जाएगा. मुझे इनपुट मिला है कि कोई बम ब्लास्ट होगा सुबह के वक्त शायद सऊदी एंबेसी या अमेरिकन एंबेसी में ब्लास्ट होगा ऐसा असलम को इनपुट मिला था. बाद में पता चला कि जहां बम ब्लास्ट होना था वो तो मेरा ही घर था. सुबह 5 बजे असलम घर आया. मैंने खाना पूछा तो नहीं खाया. कुदरत ने उस दिन काम मुझसे लिया, मैंने मेन गेट पर सारी गाड़ियां लगवा दी थीं. मैंने कहा मेन गेट नहीं साइड गेट इस्तेमाल होगा, मैने असलम को कहा था आप गेट नंबर-2 से आयेंगे. सुबह 7 बजे मैं बाहर आई और कुछ देर बाद जोरदार धमाका हुआ, चौधरी गहरी नींद में था धमाके से खिड़की टूटी उसके ऊपर गिरी. घर का सारा समान नीचे गिर गया. 2 कमरे बचे जिसमें हम सारे बच गए. 350 किलो विस्फोटक से भरा बम था. आवाज बहुत दूर तक गई थी, धमाका इतना जोरदार था कि जमीन से पानी आने लगा, 8 लोग बम धमाके में मारे गए थे. बम धमाके की जिम्मेदारी तहरीके तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली थी, उसके कमांडर से चौधरी असलम की खूब गाली गलौच हुई थी. चौधरी ने कहा था कि मैं गोली से नहीं मरूंगा, अगर कभी मरूंगा तो बम ब्लास्ट में मरूंगा. चौधरी पर 11 जानलेवा हमले हुए थे.

साल 2014 में चौधरी की हत्या हुई थी. मैं उस दिन एक अस्पताल से दोपहर 3 बजे ड्राइवर के साथ घर आई, रास्ते में जब मैं थी तो अपनी बहन को कॉल किया कि असलम कहां है क्योंकि मैं असलम को घर छोड़ कर गई थी. तो मैंने सोचा था कि असलम के सोकर उठने से पहले मैं घर आ जाऊंगी. बहन ने बताया कि असलम तैयार हो रहा है कहीं जा रहा है, मै नाराज थी एक हफ्ते से मैं दुबई से आई थी. मुझे गन मैन ने छुपकर बताया था कि आप दुबई से आ जाएं असलम को थ्रेट है, मुझे 3 दिन से ज्यादा कहीं रुकने की इजाजत नहीं होती थी. मैंने बोला आप के पास बम प्रूफ गाड़ी नहीं है मैं आपको जाने नहीं दूंगी, असलम ने कहा था 5 दिन रुक जाओ मेरे पास गाड़ी आ जाएगी, बोला मुझे कुछ नहीं होगा, मेरे सिर पर उस दिन हाथ रखा और कहा कि मुझे माफ कर देना मैं आपको कभी टाइम नहीं दे सका, मैंने कहा मुझे आप से कोई गिला नहीं है.

असलम घर से निकला मैंने छत से उसको बाय किया और घर से निकले कोई 10-12 मिनट हुआ होगा, आगे टोल था उन्होंने वहां से मुझे कॉल किया कि नूरीन आज मेरा दिल चाहता है कि हम कहीं और मिलें. दरअसल वो घर का कह रहे थे. क्योंकि हमारी जिंदगी उस वक्त मुश्किल में थी तो हमारे कई घर थे. मैंने कहा मेरी तबीयत ठीक नहीं है हम कल चलेंगे. इतने में कहते हैं खुश रहना आपके चौधरी का खुदा हफीज. इतने में बम ब्लास्ट हुआ, फिर ब्रेकिंग चलती रही कि जख्मी हुआ लेकिन मेरे दिल ने इकरार कर लिया कि अब चौधरी इस दुनिया में नहीं रहा. 125 किलो विस्फोटक से लदी कार चौधरी की कार से टकराई थी, फिदायीन हमला था. सभी नेताओं के फोन आए थे, परवेज मुशर्रफ ने सबसे पहले कॉल किया था, अफसोस का इजहार किया था, नवाज शरीफ का कॉल आया था, पाकिस्तान के प्रेसिडेंट ने कॉल किया था सबने अफसोस का इजहार किया था. TTP ने हमले की जिम्मेदारी ली थी.

चौधरी कभी रहमान से नहीं डरा, चौधरी जब कभी TTP से नहीं डरा तो रहमान क्या चीज था. रहमान ने खुद कहा था चौधरी असलम मेरे लिए खतरा है बाकी मुझे कोई कुछ नहीं करेगा.रहमान छुप जाता था, गांव में पनाह लेता था. चौधरी एक एनकाउंटर में जेल गया था, 1 साल 18 महीने जेल में था चौधरी, वो केस बाद में सियासी केस बन गया था. जेल से वापस आने के बाद चौधरी असलम रहमान डकैत के पीछे पड़ा. जेल से वापस आते ही चौधरी ने कहा मेरे लिए दुआ करो, एक रहमान ऊपर है जमीन का रहमान मुझे चाहिए , मैंने असलम को कहा था 14 दिन के अंदर रहमान तुम्हारे हाथों से जाएगा. असलम चौधरी के पास कुर्सी नहीं थी, दरअसल असलम जेल में था उस पर केस हो गया था. तो उस के पास कुर्सी नहीं थी. चौधरी ने कहा था कि मैं जेल चला गया लोग सोचते हैं कि मैंने पैसा खाया. कोई उम्मीद नहीं थी रहमान डकैत की लेकिन एक कॉल ट्रेस हुई थी और रहमान डकैत मिल गया था. ढेर सारी कहानियां चलती हैं कि ईरान से लौट रहा था, उसकी रास्ते में दुश्मनी हो गई उन लोगों ने तोहफा दे दिया था. असलम को डायरिया हुआ था, एक खबर आई असलम ने कहा मेरा बैग पैक करो मुझे कहीं जाना है, मेरे कान में कहा मेरे लिए दुआ करना. असलम ने कहा मुझे कॉल मत करना जब तब मैं कॉल न करूं. 5 दिन बाद असलम ने कॉल किया कहा मेरे बर्दाश्त से बाहर हो गया है वो जंगल था वहां खाना नहीं मिलता था, मेरे तबीयत ठीक नहीं है. असलम ने अपने सुरक्षा गार्ड को कहा गाड़ी आएगी तो तुम सामने खड़े हो जाना, सुरक्षा गार्ड जैसे ही गाड़ी के सामने आया रहमान के बंदों ने पहचाना और फायरिंग करने लगे. असलम मैदान में कूद गया उसके साथ 5 बंदे थे, असलम ने बोला फायर खोल दो , फायरिंग हुई रहमान घायल हुआ. रहमान की बॉडी जब जिन्ना हॉस्पिटल में थी वहां बहुत भीड़ थी दुनिया भर के लोग थे ल्यारी के सारे लोग आए हुए थे.ल्यारी की भीड़ ने रहमान डकैत की बॉडी छीन ली, असलम जूनियर्स थे उनसे. असलम ने ल्यारी के लोगों से बॉडी छीनी और बोला बॉडी पोस्टमार्टम हाउस जाएगी आपको बॉडी कल मिलेगी.ल्यारी माफियाओं का अड्डा था इसलिए बनाया गया था ल्यारी टास्क फोर्स, सिर्फ रहमान नहीं था, अरशद पप्पू था, गफूर दादा अलग अलग ग्रुप थे.

रहमान एक बार मेरे घर के बाहर आया था, मैंने तो नहीं देखा था मेरे बच्चों ने देखा था. मुझे कॉल भी किया था एक बार जब असलम साहब जेल में थे तब. रहमान डकैत ने मुझे रात 10 बजे कॉल किया था कि माना कि बहुत दिलेर लेडी हैं आप. मैंने कहा कि फिर मानो कि मैं एक शेर की शेरनी हूं, मैंने कहा आप कौन हैं उसने कहा मुझे खान बोलते हैं. मैंने असलम को कॉल किया कि ये खान कौन है, असलम ने कहा क्या हुआ, मैने कहा उसने कॉल किया था.

चौधरी असलम ने रहमान डकैत को पाकिस्तान क्वेटा से पहली बार गिरफ्तार किया था, तब रहमान ने असलम से कहा था कि सुना है कि बड़ा मर्द आदमी है मैं तेरे साथ एक बाइट खाना चाहता हूं, सुबह का नाश्ता. असलम ने कहा था ख्वाहिशें तो मै सारी पूरी करूंगा. रहमान ने कहा था मुझे पता है अभी आप मुझे मार दोगे, असलम ने कहा नहीं तो. बाद में गिरफ्तार करके कराची लाए, 2 महीने जेल में रखा, असलम रहमान की फैमिली से भी रहमान को मिलवाता था. बाद में चौधरी खुद जेल में चल गया था उधर रहमान जेल से बाहर आ गया था.

नूरीन ने बताया कि मुझे असलम ने गोली चलाने की ट्रेनिंग दी थी. मैं 9 MM, ग्लॉक पिस्टल चला लेती हूं पुलिस जो हथियार चलाती है वो सब चलाने की ट्रेनिंग दी. मैंने असलम को कहा था क्या हुआ मुझे फूलन देवी बनायेंगे आप, उसने कहा नहीं कभी वक्त पड़ा जो आप पे गोली चलाए तो जवाब आपको देना है.असलम KPK मानशेरा से आगे एक गांव है डोंडियाल वहां के रहने वाले थे. मैं एबटाबाद में एक गांव की रहने वाली हूं. असलम चौधरी मेरा कजिन था, मेरे मामू का बेटा, शादी मुझे कभी पसंद नहीं थी पुलिस और डॉक्टर से मैंने मना किया, मेरी मां के आंसू काम आए और शादी हुई.

TTP का कराची में नेटवर्क तोड़ने वाले ही चौधरी असलम थे. TTP ने तो खुद कहा था कि हमने मारा चौधरी असलम को. TTP कमांडर ने चौधरी को फोन करके बोला था तू दिलेर है हमारे रास्ते से हट जाओ, चौधरी ने 20 मिनट गालियां दी थीं. कोई प्राइम मिनिस्टर भी TTP को गाली देके दिखाए तो मैं मान जाऊं.

रहमान अगर बेनजीर और जरदारी परिवार का करीबी था. सब कुछ था तो सिंध हुकूमत ने 50 लाख हेड मनी क्यों रखी थी. वो तो रहमान डकैत को बचा सकती थी. अगर उनके रिश्ते अच्छे थे तो. उधर तो 10 ग्रुप काम करते थे, साल 67 की बात है, हाजी लालू से शुरू हुआ केस. ल्यारी जरदारी परिवार की 40 से 45 साल से सीट है, अभी भी है. लेकिन उन लोगों ने ही ऑपरेशन चलवाया.

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