NATIONAL : उत्तराखंड से आंध्र प्रदेश तक 12 राज्यों के जंगलों में भड़की आग, मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर में भीषण गर्मी और लू का कहर जारी है। इस बीच 12 राज्य जंगल की आग की चपेट में हैं। सैटेलाइट डेटा के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के जंगलों में सैकड़ों ‘लार्ज फॉरेस्ट फायर’ की घटनाएं दर्ज की गई हैं।भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को कम से कम 10 जंगल की आग लगातार तीन दिनों से अधिक समय तक जलती हुई पाई गई। मध्य भारत का मध्य प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित राज्य है।

उत्तर में उत्तराखंड, पश्चिम में गुजरात और दक्षिण में आंध्र प्रदेश तक… भारत के 12 से अधिक राज्यों में बड़े पैमाने पर आग लगने से वन क्षेत्र के विशाल भूभाग जल गए हैं। एफएसआई के आंकड़ों के अनुसार, भारत के लगभग आधे वन क्षेत्र आग लगने की आशंका वाले हैं।हालांकि, अप्रैल महीने में जंगल में लगी इस आग के वजह से किसी भी मानव के हताहत होने की खबर नहीं है लेकिन उत्तराखंड से लेकर आंध्र प्रदेश तक फैले इन जंगलों में लगी आग वन्यजीवों के लिए काल बन रही है और पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंचा रही है।

पिछले कुछ दिनों मध्य प्रदेश 634 ‘बड़ी आग’ की घटनाओं के साथ देश में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बनकर उभरा है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में 465-465 और आंध्र प्रदेश में 400 से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा पूर्वोत्तर में जहां के जंगलों में आग लगने की सबसे अधिक संभावना होती है, असम में 190 आग की घटनाएं और मणिपुर में 128 घटनाएं दर्ज की गईं।

जंगलों में आग लगने की घटनाओं में देश के मध्य और दक्षिणी हिस्से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उत्तराखंड में जंगल की आग से कम से कम 130 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हुई है। चार धाम तीर्थयात्रा मार्ग के कई हिस्सों में भी आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं।आग की घटनाओं में उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों लैंसडाउन, रानीखेत और फूलों की घाटी के पास, हिमाचल प्रदेश के शिमला में, तमिलनाडु के नीलगिरी में, आंध्र प्रदेश के शेषाचलम जंगलों में और ओडिशा के बालिगुडा के वन क्षेत्र प्रभावित हुए हैं।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 2021 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी महाराष्ट्र, दक्षिणी छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ क्षेत्र, साथ ही मध्य ओडिशा, जंगल की आग के लिए अत्यधिक संवेदनशील हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं।

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