ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है।
पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते एनर्जी सप्लाई को काफी धक्का पहुंचा है। भारत में एलपीजी को लेकर लगातार सरकार लेटेस्ट आंकड़े शेयर करती रहती है। रसोई गैस यानी कि एलपीजी (लिक्विड पेट्रोलियम गैस) को लेकर भारत की निर्भरता आयात पर काफी ज्यादा रही है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह से साफ नहीं हो पाई है। अमेरिका और ईरान में युद्धविराम हुआ है, लेकिन अभी तक दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। वहीं भारत में रसोई गैस की खपत अप्रैल के महीने में 16% तक लुढ़क कर 22 लाख टन रह गई है। रसोई गैस को लेकर आज जारी लेटेस्ट आंकड़ों में यह जानकारी मिली।

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल में एलपीजी की घरेलू खपत सालाना आधार पर 16.16% घटकर 22 लाख टन रह गई जबकि अप्रैल 2025 में यह 26.2 लाख टन थी। मासिक आधार पर भी एलपीजी खपत में गिरावट दर्ज की गई है। मार्च 2026 में एलपीजी की घरेलू खपत 23.79 लाख टन रही थी। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष छिड़ने के कारण इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आने वाली गैस की खेपों में बाधा आई।
सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए होटल और उद्योगों जैसे कमर्शियल उपभोक्ताओं को सप्लाई घटा दी है। साथ ही घरेलू सिलेंडर की दो रिफिलिंग के बीच अंतराल भी बढ़ाया गया है।
आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में विमानन ईंधन (एटीएफ) की खपत 1.37% घटकर 7.61 लाख टन रह गई, जो हवाई क्षेत्र बंद होने और उड़ानों में कमी का असर दर्शाती है। इस दौरान डीजल की खपत वृद्धि दर में भी सुस्ती रही और यह केवल 0.25% बढ़कर 82.82 लाख टन रही। मार्च में इसमें 8.1% की वृद्धि हुई थी। हालांकि पेट्रोल की खपत अप्रैल में 6.36% बढ़कर 36.7 लाख टन रही। हालांकि यह वृद्धि मार्च के 7.6% से कम है। सरकार के स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के प्रयासों के कारण पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी खपत लगातार बढ़ रही थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक तनाव का इस पर असर पड़ा है।

