प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच संयुक्त अरब अमीरात और चार यूरोपीय देशों की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाकर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। यह यात्रा यूएई के साथ रणनीतिक वार्ता से शुरू होगी और नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के साथ आगे बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए। प्रधानमंत्री की इस यात्रा का उद्देश्य मौजूदा भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। ऊर्जा प्रवाह की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न व्यापार व्यवधानों को कम करना और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाना इस यात्रा का प्रमुख केंद्र बिंदु रहने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि अगले छह दिनों में प्रधानमंत्री भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से कई विविध विषयों पर विश्व के कई नेताओं से बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का पहला गंतव्य संयुक्त अरब अमीरात होगा जहां वह राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान करने पर केंद्रित व्यापक वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री यूरोप यात्रा पर रवाना होने से पहले खाड़ी देश में लगभग चार घंटे बिताएंगे।

मोदी-अल नाहयान के बीच हुई वार्ता के बाद, भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच दो महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। इन समझौतों का उद्देश्य तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाना है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह से अस्थिर कर दिया है जिसका मुख्य कारण तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण पारगमन मार्ग है जिसके माध्यम से दुनिया की कुल पेट्रोलियम आपूर्ति के लगभग 20 प्रतिशत का आवागमन होता है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 वर्षों में कुल निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं इसलिए प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारतीय समुदाय के कल्याण पर चर्चा करने का भी एक अवसर होगा। अपनी यात्रा के दूसरे चरण में, मोदी 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यात्रा करेंगे। यह 2017 के बाद नीदरलैंड की उनकी दूसरी यात्रा होगी। इस दौरान वह राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे। साथ ही प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ बातचीत करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी की यात्रा बहुआयामी साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने का अवसर प्रदान करेगी। नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक गंतव्यों में से एक है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 अरब डॉलर का था। यह यूरोपीय देश भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है, जिसने कुल 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया है। अधिकारियों ने बताया कि मोदी की यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल पर रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय बैठकों और घनिष्ठ सहयोग की गति को और आगे बढ़ाएगी। प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड के बाद स्वीडन की यात्रा पर जाएंगे। वह प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर 17 से 18 मई तक दो-दिवसीय यात्रा के लिए स्वीडन जा रहे हैं। मोदी ने इससे पहले 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन की यात्रा की थी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ बातचीत करेंगे। इसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी और आपसी व्यापार को बढ़ाने के लिए सहयोग के नए रास्ते तलाशे जाएंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार बातचीत में दोनों पक्ष हरित ऊर्जा बदलाव, कृत्रिम मेधा, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन संबंधी उपाय और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान देंगे। अपनी यात्रा के चौथे चरण में, मोदी 18 से 19 मई तक नॉर्वे की यात्रा करेंगे। वहां वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी। यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की भी नॉर्वे की पहली यात्रा होगी।
प्रधानमंत्री मोदी नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्जा से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ भारत-नॉर्वे व्यापार और अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने और व्यापार एवं निवेश पर ध्यान देने का अवसर है। तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में होगा, जिसमें मोदी और नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के उनके समकक्ष शामिल होंगे। यह शिखर सम्मेलन अप्रैल 2018 में स्टॉकहोम और मई 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित पिछले दो शिखर सम्मेलनों पर आधारित होगा और इससे नॉर्डिक देशों के साथ भारत के संबंधों को अधिक रणनीतिक आयाम मिलने की उम्मीद है।
अपनी यात्रा के अंतिम चरण में, प्रधानमंत्री मोदी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर 19 से 20 मई तक इटली की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे मोदी ने आखिरी बार जून 2024 में जी7 शिखर सम्मेलन के लिए इटली की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ बातचीत करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए हो रही है। मोदी की इटली यात्रा का मुख्य उद्देश्य निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवोन्मेष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करना है।

