NATIONAL : ‘आधुनिक युद्ध में साथ चलना ही जीत की चाबी’, रक्षा मंत्री ने तीनों सेनाओं के तालमेल पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में आयोजित ‘कलाम और कवच’ सम्मेलन में कहा कि आधुनिक युद्ध में सफलता सेनाओं के आपसी तालमेल पर निर्भर करेगी। उन्होंने जल, थल, वायु, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में सभी बलों को एकजुट होकर काम करने पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आज के समय में युद्ध लड़ने का तरीका पूरी तरह से बदल चुका है। अब युद्ध केवल जमीन, समुद्र या हवा तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष और साइबर दुनिया तक पहुंच गया है। ऐसे में देश की सुरक्षा तभी पक्की हो सकती है जब हमारी सभी सेनाएं और रक्षा से जुड़े विभाग एक साथ मिलकर काम करें। नई दिल्ली में आयोजित ‘कलाम और कवच’ नाम के एक बड़े रक्षा सम्मेलन में उन्होंने यह अहम बात कही है। यह सम्मेलन देश को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए आयोजित किया गया था।

रक्षा मंत्री ने एक वीडियो संदेश में कहा कि आधुनिक युद्ध में अलग-अलग रहकर सफलता नहीं मिल सकती है। जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय रक्षा बल जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में कितनी कुशलता से एक साथ आते हैं। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि देश की ताकत इस बात से तय होगी कि हमारी सेनाएं, प्रयोगशालाएं और उद्योग कितनी जल्दी एक साथ सोचते हैं और काम करते हैं। इसके साथ ही रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि यह नए भारत की ताकत और आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति का सीधा सुबूत है।

इस सवाल का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि आज के समय में भू-राजनीतिक तनाव, साइबर खतरे और नई तरह की युद्ध तकनीकों को देखते हुए हम पुरानी सोच के भरोसे नहीं रह सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हमें हमेशा तैयार रहना होगा और नया सोचना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय के युद्ध के मैदान में उसी की जीत होगी जो किसी भी नए विचार या तकनीक को बहुत जल्दी हथियार बनाकर सेना तक पहुंचा सकेगा। इसलिए सेनाओं के साथ-साथ रक्षा नीति बनाने वालों, वैज्ञानिकों और उद्योगों को बिल्कुल करीब आकर काम करना होगा।

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि हथियारों के मामले में आत्मनिर्भर होना केवल देश की अर्थव्यवस्था के लिए ही नहीं, बल्कि हमारी रणनीति के लिए भी एक बहुत बड़ी जरूरत है। अगर कोई देश अपने अहम रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता है, तो संकट के समय में वह हमेशा कमजोर ही साबित होगा। इसलिए भारत को अपने देश के अंदर ही हथियारों को डिजाइन करना, बनाना और उन्हें आधुनिक करना होगा। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भी स्वदेशी तकनीक को देश के सुरक्षित भविष्य के लिए बेहद जरूरी बताया है।

नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में हुए इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में सेना के बड़े अधिकारी, रक्षा उद्योग से जुड़े लोग, वैज्ञानिक और कई विशेषज्ञ शामिल हुए। इस कार्यक्रम में कई उच्च स्तरीय चर्चाएं हुईं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े युद्ध, हाइपरसोनिक तकनीक और क्वांटम तकनीक जैसे आधुनिक विषयों पर बात की गई। इसके अलावा देश में हथियार बनाने की क्षमता को बढ़ाने और अंतरिक्ष के क्षेत्र में तरक्की को लेकर भी चर्चा की गई। इस सम्मेलन में एक खास प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें भारत की प्राइवेट कंपनियों और छोटे उद्योगों द्वारा बनाए गए नए रक्षा उपकरणों को दिखाया गया।

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