NATIONAL : क्यों इस तरह की आजादी का दिखावा? मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर SC ने उठाए सवाल

0
47

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (14 मई 2026) को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए गठित चयन समिति में कैबिनेट मंत्री को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया. कोर्ट ने कहा कि कोई मंत्री निर्णय लेने की प्रक्रिया में प्रधानमंत्री के खिलाफ नहीं जा सकता. मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पैनल के स्ट्रक्चर पर चिंता व्यक्त की. वर्तमान में इसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा, ‘अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है? एक मंत्री कभी भी अपने प्रधानमंत्री के फैसले के खिलाफ नहीं जाएगा, जिससे फैसला हमेशा 2:1 के बहुमत से सरकार के पक्ष में ही रहेगा.’

कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग के लिए नियुक्ति प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बनाए रखने से संबंधित है. अदालत ने आगे कहा कि यदि भारत के चीफ जस्टिस केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया जा सकता है?

बार एंड बेंच के अनुसार, जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा, ‘अगर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए CBI की नियुक्ति में निष्पक्षता जरूरी है तो लोकतंत्र को बचाने और साफ-सुथरे चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में और भी ज्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए. चयन समिति में तीसरा सदस्य सरकार का ही मंत्री क्यों होना चाहिए? इस कमेटी में सरकार के मंत्री की जगह कोई स्वतंत्र सदस्य होना चाहिए, ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे.’

लाइव लॉ के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए रिटायर IAS अधिकारी एस.एन. शुक्ला ने कोर्ट में अपनी बात रखते हुए न केवल चुनाव आयुक्तों को चुनने वाले नए कानून को चुनौती दी, बल्कि उस कानून के तहत हुई वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए.

एस.एन. शुक्ला ने स्पष्ट किया कि उनकी यह चुनौती सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पिछले (अनूप बरनवाल) फैसले के आधार पर नहीं है, बल्कि उन्होंने RTI के जरिए ऐसे ठोस सबूत जुटाए हैं जो इन नियुक्तियों में कानूनी खामियों को साबित करते हैं. उनका कहना है कि वर्तमान नियुक्तियां कानून के सही मापदंडों पर खरी नहीं उतरती हैं, इसलिए उन्हें रद्द किया जाना चाहिए.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here