दुनिया का ध्यान बीते कुछ दिनों से ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार पर लगा हुआ था लेकिन मंगलवार से चीजें एक अलग दिशा में मुड़ती हुई दिख रही हैं।
तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बनी नाजुक शांति खतरे में पड़ गई है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान पर हवाई हमले किए हैं। होर्मुज के पास ईरान के द्वीपों पर हमले किए गए। इसके कुछ घंटे बाद ही ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दाग दिए। इस बीच अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने पर दी गई छूट भी वापस ले ली है। अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच हुए इस घटनाक्रम से पश्चिम एशिया में युद्ध लौटने की आशंका गहरा गई है।
फर्स्टपोस्ट के मुताबिक, ये हमले ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार के दौरान हुए हैं, जिनकी युद्ध की शुरुआत में मौत हो गई थी। इन हमलों से उन बातचीत में भी मुश्किलें बढ़ेंगी जिनका मकसद जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलना, तेहरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम को रोकना और युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करना है।

अमेरिका के ईरान पर हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि बुधवार सुबह ईरान पर हमले होर्मुज में जहाजों पर किए गए अटैक के जवाब में हैं। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन टैंकरों पर हमले हुए थे। ईरान ने इन हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है लेकिनअमेरिका ने इसके लिए रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को दोषी ठहराते हुए हवाई अटैक किए हैं।
हमलों में अमेरिकी सेना ने ईरान के केशम और बंदर अब्बास में एयर-डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी सिस्टम, मिसाइलों और एंटी-शिप क्रूज मिसाइल साइटों, ड्रोन लॉन्च साइटों और बंदरगाह सुविधाओं को निशाना बनाया। अमेरिकी आर्मी ने ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। आईआरजीसी की छोटी नावों पर भी हमला किया गया है।
अमेरिका के कदम इस्लामाबाद MoU के आर्टिकल 1, 2 और 10 का खुला उल्लंघन हैं। अमेरिका की ओर से समझौते के उल्लंघन के नतीजों को लेकर गंभीर मानते हुए ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएगा।
काजेम गरीबाबादी
ईरानी तेल पर प्रतिबंध
अमेरिका ने हमलों के साथ ही जून में जारी ईरान के तेल की बिक्री की अनुमति देने वाले अपने सामान्य लाइसेंस को रद्द कर दिया है। यह सामान्य लाइसेंस युद्ध को समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा के रूप में काम करने वाले युद्धविराम समझौते के हिस्से के रूप में जारी किया गया था।
ईरान को तेल पर छूट ना देने का यह फैसला 17 जुलाई से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस कदम का तेहरान पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जिसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित रही है। इससे ईरान की विश्व बाजार में कच्चा तेल बेचने की क्षमता कम हो जाएगी।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है और जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिकी आक्रामकता का करारा जवाब दिया जाएगा।
ईरानी सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य के मामलों या प्रबंधन में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी ईरानी तेल निर्यात पर छूट को रद्द करने और देश पर हालिया हमलों के अमेरिकी फैसले की निंदा की है।
MoU वास्तव में ईरान और अमेरिका के बीच सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने का एक समझौता है। इसलिए जब तक हमारे पास वह शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक ना सिर्फ इस तरह की झड़पें बल्किपूरे क्षेत्र में संघर्ष भड़काने की गुंजाइश है।
जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी की सीना अजादी
युद्धविराम का क्या होगा?
ईरान पर अमेरिकी हमलों से उस नाजुक युद्धविराम पर खतरा मंडरा रहा है, जिस पर दोनों देश सहमत हुए थे। इससे पश्चिम एशिया में युद्ध लौटने का खतरा बढ़ गया है। सीएनएन के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय सहयोगियों ने तनाव बढ़ने से रोकने और युद्धविराम बनाए रखने के लिए अमेरिका और ईरान को संदेश भेजे हैं। खाड़ी के देशों को डर है कि एक बार फिर लड़ाई छिड़ी तो उनको अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

