NATIONAL : बंगाल के स्कूलों में मोबाइल पर सख्ती, कक्षा में लाने और इस्तेमाल पर रोक ,माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी की नई गाइडलाइन

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद ने राज्य के लगभग 17 हजार माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में छात्रों के मोबाइल फोन लाने और इस्तेमाल को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार, स्कूल के समय में प्रार्थना सभा, कक्षाओं, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान छात्रों के मोबाइल फोन लाने और उपयोग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों, जैसे दूर-दराज से आने वाले छात्रों की सुरक्षा या चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति में संस्थान प्रमुख की पूर्व अनुमति मिलने पर ही मोबाइल लाने की छूट दी जा सकती है। ऐसे मामलों में भी मोबाइल फोन बंद या साइलेंट मोड में रखना होगा और बिना अनुमति उसका उपयोग नहीं किया जा सकेगा। स्कूल चाहें तो ऐसे उपकरणों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी कर सकते हैं।

मोबाइल से पढ़ाई पर पड़ रहा असर

शिक्षा विभाग के अनुसार, कई छात्र स्कूल में मोबाइल लाकर कक्षा और अवकाश के दौरान गेम खेलते हैं, चैट करते हैं, फिल्में डाउनलोड करते हैं और मिड-डे मील या अन्य गतिविधियों के रील व वीडियो बनाते हैं। आठवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों में यह प्रवृत्ति अधिक देखी गई है। इससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित होता है और शिक्षक व अन्य छात्रों का ध्यान भी भंग होता है।

जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश

बोर्ड ने स्कूलों से कहा है कि शिक्षक-शिक्षिकाएं छात्रों को डिजिटल उपकरणों के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के बारे में नियमित रूप से जागरूक करें। साथ ही अभिभावकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें, ताकि वे अनावश्यक रूप से बच्चों को मोबाइल लेकर स्कूल न भेजें। यदि किसी आपात स्थिति में छात्र को मोबाइल लाना आवश्यक हो, तो अभिभावकों को पहले स्कूल कार्यालय से संपर्क करना होगा।

साइबर सुरक्षा और अनुशासन पर जोर

दिशा-निर्देश में स्कूलों को साइबर सुरक्षा, तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण बनाए रखने के लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी सलाह दी गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के अधिकांश छात्र अब भी स्कूल में स्मार्टफोन नहीं लाते, लेकिन जिन स्कूलों में यह समस्या सामने आ रही है, वहां इससे अनुशासन, पढ़ाई और छात्रों के बीच समानता पर असर पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है। ट्रैवलगाइड पढ़ें

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