NATIONAL : ‘लोकतंत्र को खत्म करने का औजार..’ लालकृष्ण आडवाणी को SIR के नोटिस पर बोले खरगे

0
35

एसआईआर प्रक्रिया के तहत दिल्ली के कई वीवीआईपी राजनीतिक हस्तियों को नोटिस जारी किया गया है. इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम चल रहा है. एसआईआर प्रक्रिया के तहत दिल्ली के कई वीवीआईपी राजनीतिक हस्तियों को नोटिस जारी किया गया है. इस लिस्ट में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से लेकर पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी तक कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग पर हमला बोला है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट शेयर किया है. उन्होंने लिखा, बिहार से शुरु हुआ SIR अब जब दिल्ली में दस्तक दे चुका है, तब शायद सत्ताधीशों को पता चल रहा है कि कांग्रेस पार्टी पूरे प्रोसेस को पहले दिन से Flawed क्यों कह रही थी.

मल्लिकार्जुन खरगे ने लिखा, SIR केवल बीजेपी के वोट चोरी व लोकतंत्र को खत्म करने का औजार ही नहीं है बल्कि ये Flawed Process एक Frankenstein Monster जिसने अब उसी के लोगों को फंसा दिया है. बीजेपी के ही कई बड़े नेता – भाजपा के वरिष्ठतम, लालकृष्ण आडवाणी जी, मौजूदा विदेश मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल (LG), राज्यसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री आदि शामिल हैं, इन सबको अब नोटिस दिया गया. हालत यह कि कि इससे पहले भारत रत्न से सम्मानित वैज्ञानिक व पूर्व नौसेना प्रमुख को भी नोटिस जारी किए जा चुके है.

बंगाल में जिन लोगों के नाम काटकर उन्हें वोट देने से रोका गया, उनमें अब तक फैसला हुए मामलों में 93% लोग अपनी अपील जीत गए – यानि 1,13,943 लोगों को फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा! वाह ! किस आधार पर उनका मताधिकार छीना गया?

ऊपर से चुनाव आयोग आज आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर के “VIP/marked electors” का वर्णन करता है. क्या अब भारत के Universal Adult Franchise में मतदाताओं की कोई Special Category है — VIP मतदाता और आम मतदाता?
क्या हमारे संविधान ने जो One Person, One Vote, One Value का सिद्धांत दिया था, ये उसकी अवेहलना नहीं है? क्या VIP वोट अब ज्यादा क़ीमती हो गया है?

SIR के पहले तीन चरणों में 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 13.8 करोड़ मतदाता सूची से बाहर हुए—यानी 94.78 करोड़ मतदाताओं में से करीब 14.61%, उनपर हाथ पर हाथ धरे किसके इशारे पर बैठा रहता है? VIPs के लिए प्रेस रिलीज, करोड़ों आम मतदाताओं के लिए खामोशी!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here