NATIONAL : फॉर्म-6 में एक कॉमा या फुल स्टॉप तक नहीं बदला… सुप्रीम कोर्ट के कमेंट के बाद चुनाव आयोग

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सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के कुछ घंटों बाद चुनाव आयोग ने साफ किया कि मूल फॉर्म 6 में एक कॉमा भी नहीं बदला गया है। SIR के दौरान सिर्फ एक अतिरिक्त घोषणा पेज जोड़ा गया था, जो पिछले साल बिहार में बने प्रोटोकॉल का हिस्सा है।

चुनाव आयोग का बड़ा दावा
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी के कुछ घंटों बाद चुनाव आयोग ने अपना रुख दोहराया है। साफ कहा कि मूल फॉर्म 6 में एक कॉमा या फुलस्टॉप भी नहीं बदला गया है। SIR के दौरान सिर्फ एक अतिरिक्त घोषणा पेज जोड़ा गया था, जो पिछले साल बिहार में बने प्रोटोकॉल का हिस्सा है। यह सफाई तब आई जब CJI सूर्यकांत ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी बदले हुए फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि साफ-साफ बता दें। जब रिकॉर्ड आएगा, तो हम देखना चाहेंगे कि बदलाव किसने किया।

चुनाव आयोग ने बताया कि अतिरिक्त घोषणा वाला पेज बिहार SIR के दौरान तैयार किए गए प्रोटोकॉल के तहत जोड़ा गया था। इस प्रोटोकॉल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि यह कदम चुनाव आयोग को मिली संवैधानिक शक्तियों के दायरे में आता है। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अतिरिक्त घोषणा भी उसी प्रोटोकॉल का हिस्सा थी, इसलिए मूल फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया।

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वहीं, कानूनी जानकारों ने हालांकि अलग राय रखी है। उन्होंने कहा कि घोषणा जोड़ने से पहले सरकार और चुनाव आयोग के बीच जरूरी सलाह-मशविरा पूरा होना चाहिए था। किसी भी बदलाव या अतिरिक्त नियम को गजट में नोटिफाई करके संसद के सामने रखना जरूरी होता है। उनके मुताबिक, सिर्फ आंतरिक प्रोटोकॉल से फॉर्म में कुछ जोड़ना कानूनी प्रक्रिया का पूरा पालन नहीं माना जा सकता।

दूसरी ओर विपक्ष की तरफ से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने फॉर्म 6 को गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से बदला। उन्होंने चुनाव आयोग के पिछले महीने जारी प्रेस बयान का हवाला दिया। उस बयान में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 के साथ दी गई घोषणा को सही ठहराया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि आयोग का यह बयान और कोर्ट की ताजा टिप्पणी एक-दूसरे से मेल नहीं खाती।

दरअसल, यह पूरा मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिका इंडियन एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट के आधार पर दायर की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि SIR से जुड़े फैसलों पर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्ति उन फैसलों पर थी जिनमें फॉर्म 6 में आवेदक के पुरखों की जानकारी और पिछले SIR से लिंक देने की शर्त शामिल थी।

याचिका में आरोप है कि चुनाव नियमों के तहत जरूरी कानूनी बदलाव किए बिना ये शर्तें सॉफ्टवेयर के जरिए लागू कर दी गईं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दो चुनाव आयुक्तों ने साफ कहा था कि तय फॉर्म में बिना कानूनी प्रक्रिया के बदलाव नहीं किया जा सकता। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि CEC ज्ञानेश कुमार के तहत शुरू, मंजूर या लागू किए गए सभी फैसले, गाइडलाइन, निर्देश और सॉफ्टवेयर बदलाव असंवैधानिक और शुरू से अमान्य घोषित किए जाएं। याचिका में कहा गया है कि ये फैसले पूरे आयोग की मंजूरी के बिना या ज्यादातर चुनाव आयुक्तों की राय के खिलाफ लिए गए।

हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मूल फॉर्म 6 जस का तस है। अतिरिक्त पेज सिर्फ घोषणा के लिए जोड़ा गया था और वह भी पहले से तय प्रोटोकॉल के तहत। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस प्रोटोकॉल को आयोग की शक्तियों के अंदर मान चुका है।

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