दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है। मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर युवा आंदोलन और विपक्षी दलों ने विरोध जताया है। सोमवार, 12 अक्टूबर को प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से छह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया।
मतदाता सूची में बदलाव को लेकर विवाद
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवाल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले वर्ष से मतदाता सूची में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें मृत मतदाताओं, दूसरी जगह चले गए लोगों और जिनका पता नहीं चल पाया, ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं।

हालांकि, विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।
प्रदर्शनकारियों की क्या है मांग?
दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे युवा आंदोलनकारी और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।


