UP : गाजीपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने अस्पताल की खोली पोल, कहा- ‘यहां के सामानों की कोई गारंटी नहीं’

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गाजीपुर का महर्षि मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो विभाग ने इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं और सर्जिकल सामानों की गुणवत्ता की पोल खोल कर रखी दी. डॉ. ने कहा, यहां के सामानों की कोई गांरटी नहीं है.

स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मरीज के इलाज के लिए प्रति महीने करोड़ों रुपए की दवा और अन्य सर्जिकल सामानों की खरीदारी की जाती है. इलाज के लिए इस्तेमाल में लाई जानी वाली दवाओं को लेकर गुणवत्ता पूर्ण होने का दावा किया जाता है. लेकिन उन सामानों में कितनी गुणवत्ता है इसकी पोल गाजीपुर के मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने खुद खोल कर रख दी है.

अगर उसकी बात माने तो मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो विभाग में सरकारी स्तर पर प्लास्टर के लिए आए हुए सामान से मरीज कभी भी ठीक नहीं हो सकता. इतना ही नहीं उसने यह भी कह डाला है कि अगर उसे अपने कुत्ते का इलाज कराना हो तो भी वह इस अस्पताल में ना कराए. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर स्वास्थ्य विभाग की पिछले कई दिनों से किरकिरी कर रही है.

गाजीपुर का महर्षि विश्वामित्र राजकीय मेडिकल कॉलेज जिसकी स्थापना के बाद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलने का दावा किया जा रहा था. लेकिन अब यहां भी मरीज से खुलेआम बाहर से सामान लाकर इलाज करने की बात कही जा रही है. इसी तरह का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. जिसमें ऑर्थो विभाग में तैनात डॉ वैभव के पास एक मरीज जिसके पैर में फैक्चर होने के कारण अस्पताल के द्वारा प्लास्टर चढ़ाया गया था.

बावजूद इसके उस मरीज को आराम होने की बजाय दर्द हो रहा था और जब मरीज के परिजन डॉक्टर के पास पहुंचे तब डॉक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि यहां के सामानों की कोई गारंटी नहीं है. अगर इलाज कराना है तो बाहर से दो से ढाई हजार रुपए का पूरा सामान मिलेगा. उसे लेकर आइए तब मरीज को एक महीना में ठीक किया जा सकता है.

जब मरीज के परिजन सरकारी अस्पताल का हवाला देकर बात करने लगते हैं तो डॉक्टर चिढ़ जाता है और वह यहां तक कह देता है कि अगर उसे अपने कुत्ते का इलाज इस अस्पताल में करना हो तो वह भी न कराए. यह सब बात कहते समय अस्पताल के सीएमएस के साथ ही बाउंसर अन्य लोग भी मौजूद रहे.

वही डॉक्टर वैभव सिंह के द्वारा दिए गए बयान वायरल होने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आनंद मिश्रा ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल में जो भी सामान खरीदी जाती है वह पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और मानक पर खरे उतरने के बाद ही खरीदारी की जाती है. ऐसे में डॉक्टर ने जो भी बयान दिया है उसके लिए जांच कमेटी बना दिया गया है. जो अगले 4 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी और इस रिपोर्ट के आधार पर शासन पर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा.

 

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