NATIONAL : कृत्रिम बारिश, एंटी-स्मॉग गन, 70 लाख पेड़ लगाने की तैयारी… प्रदूषण के खिलाफ दिल्ली सरकार का मास्टरप्लान तैयार

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दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपने मास्टप्लान का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि आईआईटी कानपुर के सहयोग से क्लाउड सीडिंग तकनीक से कृत्रिम वर्षा का पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा. मानसून छोड़कर पूरे साल 1000 वॉटर स्प्रिंकलर, 140 एंटी-स्मॉग गन, 70 नई मैकेनिकल रोड स्वीपर और इलेक्ट्रिक लीटर पीकर्स तैनात किए जाएंगे.

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए विस्तृत योजना की घोषणा की है. इसमें आईआईटी कानपुर के सहयोग से कृत्रिम वर्षा का पायलट प्रोजेक्ट, वर्षभर वॉटर स्प्रिंकलर व एंटी-स्मॉग गन का संचालन, और नई रोड स्वीपर मशीनें शामिल हैं. निर्माण कचरा प्रबंधन के लिए नियम, वाहनों से उत्सर्जन घटाने के उपाय, और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार किया जाएगा. 5 जून से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 70 लाख वृक्षारोपण का लक्ष्य है, साथ ही कूड़े के पहाड़ों को समाप्त करने की योजना पर भी कार्य होगा. ये जानकारियां दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर दी है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि आने वाली सर्दियों में ऑड-इवन स्कीम लागू नहीं की जाएगी. उन्होंने बताया कि सरकार का मानना है कि यह योजना लोगों की परेशानी बढ़ाने के लिए पिछली सरकारों ने लाई थी, पर प्रदूषण कम करने पर इसका असर नहीं हुआ.मुख्यमंत्री ने इस मौके पर इस साल के वायु प्रदूषण मिटिगेशन प्लान का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है. “क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली और हेल्थी दिल्ली” के लिए सरकारी प्रयास तेज किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि प्रदूषण कम करने के लिए लेटेस्ट इनोवेशन और तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे.

रेखा गुप्ता ने कहा, प्रदूषण को कम करने के लिए खत्म करने के लिए हमारे जीतने भी साइंस ऑर्गेनाइजेशन हैं हम उनके साथ MoU (एमओयू) करेंगे. जो कि अपने लेटेस्ट इनोवेशन आइडियाज उसको दिल्ली सरकार के साथ मिलकर के प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने में सहयोग करेंगे.

उदाहरण के लिए दिल्ली सरकार ने अभी IIT कानपुर के साथ एक एमओयू साइन किया. जो कि क्लाउड सीडिंग और आर्टिफीसियल बारिश पर आधारित है. जिसको हमने एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करने की मंजूरी दी है और बहुत जल्द दिल्ली में पहली बार क्लाउड सीडिंग के द्वारा आर्टिफीसियल बारिश की जाएगी.

इसी तरीके से प्रदूषण से लड़ने के लिए हम लोगों ने अनेकों युवाओं को इसके साथ जोड़ने के लिए जो स्टार्ट अप्स है और जो इनोवेशनल चैलेंजेस दिल्ली के प्रदूषण को लेकर के हम आमंत्रित करेंगे की जो की कॉस्ट इफेक्टिव भी होंगे और इफेक्टिव सलूशन भी दिल्ली को दे पाएंगे कि किस-किस तरीके से हम इस एयर प्रदूषण के चैलेंज को कम कर पाएं.इससे पहले क्या होता था पहले की सरकारों दिल्ली गवर्नमेंट के लेवल पे कम काम हो पाता था परंतु कहीं एमसीडी के लेवल पर कहीं एमसी के लेवल पर कुछ कुछ वाटर स्प्रिंक्लर चलते हुए दिखाई देते थे. वो भी तब जब भरी सर्दी होती थी और सर्दी के समय में ये माना जाता था कि अब प्रदूषण का समय शुरू हो गया. पर सच मानिये बहुत ज्यादा डीटेल्स स्टडी करने के बाद हम लोग इस नतीजे पर हैं की प्रदूषण जो है केवल मात्र दो महीने का काम नहीं है. ये साल भर रहने वाला प्रॉब्लम है.

 

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