NATIONAL : आसाराम को फिर मिली बड़ी राहत, राजस्थान हाई कोर्ट ने अंतरिम जमानत को बढ़ाया

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रेप के दोषी आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से एक बार फिर बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने आसाराम की अर्जी को स्वीकार करते हुए 30 जून तक उसकी अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया है. आसाराम ने अपनी याचिका में स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था. कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली है.

वकील यशपाल सिंह राजपुरोहित ने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट में आज हमने आसाराम बापू को दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ाने की अपील पेश की. अदालत ने मामले को सुना और हमारी अर्जी स्वीकार कर ली. इससे पहले, हमने गुजरात हाई कोर्ट में भी इसी तरह का एक आवेदन दायर किया था, जिसे तीन महीने के विस्तार के लिए स्वीकार किया गया था. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत द्वारा अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने को मंजूरी दी गई है.

उल्लेखनीय है कि अगस्त 2013 में एक 16 वर्षीय लड़की ने आसाराम पर राजस्थान के जोधपुर के पास अपने आश्रम में उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. पीड़िता के माता-पिता ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके कारण 31 अगस्त, 2013 को आसाराम को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद, अप्रैल 2018 में जोधपुर की एक अदालत ने आसाराम को नाबालिग से रेप का दोषी ठहराया और उसे भारतीय दंड संहिता, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई.अक्टूबर 2013 में और आरोप सामने आए जब एक पूर्व शिष्या और सूरत की एक महिला ने आसाराम पर अहमदाबाद के मोटेरा में अपने आश्रम में 2001 से 2006 के बीच बार-बार यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया.

इसके बाद एक और कानूनी मामला सामने आया, जिसका समापन जनवरी 2023 में हुआ जब गांधीनगर की एक अदालत ने आसाराम को रेप के लिए दोषी ठहराया, जो इस तरह के आरोपों पर उनकी दूसरी सजा थी. इन सजाओं के अलावा, आसाराम के बेटे नारायण साईं पर भी इसी तरह के आरोप लगे.2013 में सूरत की दो बहनों ने आरोप लगाया कि आसाराम और नारायण ने 2000 के दशक के मध्य में उनका यौन उत्पीड़न किया था. बड़ी बहन ने आसाराम पर आरोप लगाया, जबकि छोटी बहन ने नारायण पर 2002 से 2005 के बीच सूरत आश्रम में हमले का आरोप लगाया.

 

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