ENTERTAINMENT : खराब राइटिंग, बेतरतीब प्रेजेंटेशन, एड़ी-चोटी का जोर लगाते सलमान खान…बोरिंग है फर्स्ट हाफ

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सलमान खान का अपना एक फैनडम है, जो फिल्म कैसी भी हो, पूरे शो में सीटियों-तालियों से माहौल बनाए रखता है. मगर फर्स्ट हाफ में ‘सिकंदर’ ने इन फैन्स को अपने बंधे हाथ खोलने का एक भी मौका नहीं दिया है. आखिर फिल्म में ऐसा क्या है? जानने के लिए पढ़ें फर्स्ट रिव्यू…

‘सिकंदर’ आ गया है…लंबे इंतजार के बाद सलमान खान ने ईद के मौके पर अपनी फिल्म रिलीज करके फैंस को बड़ी ईदी दे दी है. मगर सलमान खान की ईदी फैंस की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है? जानने के लिए यहां पढे़ं फिल्म का फर्स्ट रिव्यू…

सलमान खान का अपना एक फैनडम है, जो फिल्म कैसी भी हो, पूरे शो में सीटियो-तालियों से माहौल बनाए रखता है. मगर फर्स्ट हाफ में ‘सिकंदर’ ने इन फैन्स को अपने बंधे हाथ खोलने का एक भी मौका नहीं दिया है. किसी के हाथ उठे भी हैं तो माथा पकड़ने के लिए.

‘सिकंदर’ का पूरा फर्स्ट हाफ इतना बिखरा हुआ है कि शायद एडिटर भी ये समझ नहीं पाए कि कौन सा सीन, किस सीन से जुड़ना चाहिए. सलमान की सबसे औसत फिल्में भी ‘सिकंदर’ जितनी ऊबाऊ नहीं हैं, और ये अपने आप में बहुत कुछ कहता है. उनकी खराब फिल्मों में भी आप ये देख कर एंटरटेन हो सकते थे कि क्या अतिविचित्र आइडिया सोचा गया है. मगर ‘सिकंदर’ में ये भी नहीं है.

फर्स्ट हाफ में ये केवल एक खोखली फिल्म है, जिसमें सलमान अपने डायलॉग बुदबुदा रहे हैं-खुसफुसा रहे हैं और औसतन हर 8 मिनट बाद अपने ही पुराने स्वैग को दोहराने की कोशिश कर रहे हैं. दिक्कत ये है कि ऐसा करने में वो बार-बार नाकाम हो रहे हैं, जो कि दुखद है.

सेकंड हाफ में ‘सिकंदर’ कितनी एंटरटेनिंग हो सकती है, इससे ज्यादा दिलचस्प अब ये देखना है कि थिएटर में बैठे कितने लोग पूरी फिल्म सर्वाइव कर सकते हैं.

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