दिल्ली हवाई अड्डे पर फर्जीवाड़े का पर्दाफाश. हरपाल के पासपोर्ट में एक प्रस्थान और दो आगमन दर्ज पाए गए. जांच में पता चला कि उसके पासपोर्ट को बेचकर किसी को भारत लाया गया था.

इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात इमिग्रेशन टीम ने एक सनसनीखेज फर्जीवाड़े का खुलासा किया है, जिसने हवाई सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है. हांगकांग से डिपोर्ट होकर लौटे एक भारतीय नागरिक के पासपोर्ट में जब एक बार का प्रस्थान और दो बार का आगमन दर्ज मिला, तो इमिग्रेशन अफसर भी चौंक गए.
जांच में सामने आया कि युवक का पासपोर्ट 2 लाख रुपये में बेच दिया गया था और उसी पासपोर्ट से किसी और को भारत भेज दिया गया था. हरपाल सिंह 7 अप्रैल को हांगकांग से इमरजेंसी सर्टिफिकेट पर भारत लौटा था. जांच में सामने आया कि वह 2016 में वैध तरीके से हांगकांग गया था, लेकिन वापसी के कोई रिकॉर्ड नहीं थे, जबकि 2025 में लौटते वक्त उसके पासपोर्ट पर दूसरा ‘आगमन’ दर्ज मिला इस बार बिना किसी ‘प्रस्थान’ के! यानि, पासपोर्ट का दुरुपयोग हुआ था.
दिल्ली पुलिस को उसने बताया कि गांव के लोगों से प्रेरित होकर वह भी जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में हांगकांग जाना चाहता था. एक दोस्त के ज़रिए उसकी पहचान एजेंट सनी उर्फ जोगिंदर पाल से हुई, जिसने 2 लाख रुपये में हांगकांग भेजने का वादा किया. टिकट और बाकी इंतजाम सनी के भाई नीरज पासी ने किए.
कुछ ही समय बाद हरपाल ने शरण के लिए आवेदन किया, लेकिन 2024 में उसका आवेदन खारिज कर दिया गया. अवैध प्रवास के चलते वह हांगकांग में गिरफ्तार हुआ और जेल की हवा खाने के बाद भारत डिपोर्ट कर दिया गया, लेकिन इस बार उसके पास खुद का पासपोर्ट नहीं, इमरजेंसी सर्टिफिकेट था.
पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू की और अमृतसर में छापेमारी कर दोनों एजेंट भाइयों सनी और नीरज को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि सनी ने हरपाल का पासपोर्ट कभी वापस नहीं किया. बल्कि उसे इस्तेमाल कर किसी और की अवैध एंट्री भारत में करवाई.
पूछताछ में सामने आया कि ये दोनों भाई पिछले कई सालों से इस धंधे में लिप्त थे और ऐसे कई लोगों को विदेश भेज चुके हैं. पुलिस अब बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज़ों की जांच कर रही है ताकि पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो सके.


